अपने पार्टनर के बारे में सोचना प्रेम हैं? प्रेमानंद महाराज से जाने रिश्तो को कैसे करें मजबूत

अपने पार्टनर के बारे में सोचना प्रेम हैं? प्रेमानंद महाराज से जाने रिश्तो को कैसे करें मजबूत

द फ्रंट डेस्क, क्या आप जरूर से ज्यादा अपने पार्टनर के बारे में सोचते हैं। एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा की हमेशा अपने पार्टनर के बारे में सोचना-बात करना प्रेम हैं? इस पर प्रेमानंद कहते हैं कि प्रेम हमेशा याद करना और बात करना या चिंतन करना नहीं है यह काम वासना है प्रेम नहीं है।

आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद जी महाराज ने प्रेम और रिश्तों को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं। उनके अनुसार, हमेशा अपने पार्टनर के बारे में सोचना और बात करना प्रेम नहीं बल्कि वासना है। प्रेम का वास्तविक अर्थ त्याग और नि:स्वार्थ भाव में है।

प्रेमानंद जी कहते हैं कि संसार का प्रेम स्वार्थ से भरा होता है। जब तक स्वार्थ पूरा हो रहा है, तब तक यह प्रेम बना रहता है। लेकिन जैसे ही स्वार्थ खत्म होता है, प्यार खत्म हो जाता है। भगवान का प्रेम ही सच्चा और स्थायी होता है, जो हर परिस्थिति में आपके साथ होता है। प्रेमानंद जी का सुझाव है कि माया के प्रवाह में बहने के बजाय व्यक्ति को मेडिटेशन और आत्मचिंतन पर ध्यान देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर प्रेमानंद जी की लोकप्रियता
प्रेमानंद जी महाराज आज के दौर में सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक गुरुओं में से एक हैं। उनके सत्संग के छोटे वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर खूब वायरल होते हैं। 11.1 मिलियन फॉलोअर्स के साथ, वे दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले आध्यात्मिक नेताओं में से एक हैं।

रिश्तों में शक से बचने के उपाय
पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर प्रेमानंद जी ने विशेष बातें साझा की हैं। उनके अनुसार, यह रिश्ता दो दिलों को जोड़ने वाला होता है, जिसमें मस्ती, प्यार और झगड़े सब शामिल होते हैं। लेकिन शक इस रिश्ते को कमजोर कर सकता है।

रिश्ते मजबूत करने के लिए अपनाएं ये तरीके:

खुलकर बात करें: अगर आपको अपने पति पर शक है, तो शांत होकर उनसे खुलकर बात करें। अपने मन की बातें साफ-साफ कहें और जानने की कोशिश करें कि आपका शक सही है या नहीं।
जरूरत से ज्यादा शक से बचें: बिना ठोस कारण के शक करने से रिश्ता खराब हो सकता है। इसलिए अपने पति पर विश्वास रखें।
आत्ममंथन करें: अपने मन में उठ रहे विचारों को शांत करें और खुद से पूछें कि क्या शक करने का कोई वास्तविक कारण है।

प्रेमानंद जी का संदेश है कि रिश्तों को संवारने के लिए आपसी विश्वास और संवाद जरूरी है। माया में बहने के बजाय आत्मचिंतन करें और अपने रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें।

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