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ईरानी अभिनेत्री एलनाज नौरोजी ने खामेनेई की मौत पर मनाया जश्न, कहा–47 साल से था इंतज़ार, महिलाओं के विरोध की पृष्ठभूमि समझिए

ईरानी अभिनेत्री एलनाज नौरोजी ने खामेनेई की मौत पर मनाया जश्न, कहा–47 साल से था इंतज़ार, महिलाओं के विरोध की पृष्ठभूमि समझिए

द फ्रंट डेस्क : ईरान के सुप्रीम लीडर ख़ामेनेई की मौत की खबर के बाद जहां देश में राजकीय शोक घोषित किया गया है, वहीं कुछ वर्गों से अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ईरानी मूल की अभिनेत्री एलनाज नौरोजी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इसे “ईरान की आज़ादी” से जोड़ा और कहा कि वह और कई ईरानी नागरिक पिछले 47 वर्षों से इस बदलाव का इंतज़ार कर रहे थे। एलनाज, जो ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘अभय’ और ‘तेहरान’ जैसी वेब सीरीज में नजर आ चुकी हैं, ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक खबर साझा करते हुए “Thank You” लिखा। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस खबर पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा और यह लंबे समय से प्रतीक्षित था।

आम नागरिकों की मौत पर सरकार को ठहराया जिम्मेदार

एलनाज ने एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा संघर्ष में किसी आम नागरिक की मौत होती है, तो इसके लिए ईरान की सरकार जिम्मेदार होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते दशकों में जनता पर अत्याचार हुए और असहमति की आवाज़ों को दबाया गया। उनके मुताबिक, ईरान में लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक तनाव बना हुआ है और कई नागरिक बदलाव की मांग करते रहे हैं।हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि एलनाज के बयानों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ लोग उनके समर्थन में हैं, जबकि अन्य इसे संवेदनशील समय में विवादास्पद टिप्पणी मान रहे हैं।

ईरान में महिलाओं पर पाबंदियां: विवाद की जड़

ईरान में महिलाओं से जुड़ी नीतियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय रही हैं। अनिवार्य हिजाब कानून और “मोरल पुलिस” की निगरानी को लेकर आलोचना होती रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के वर्षों में हिजाब नियमों को और सख्त किया गया। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना, हिरासत या कानूनी कार्रवाई की संभावना रहती है। कुछ कानूनी प्रावधानों में महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर की बात भी उठाई जाती है जैसे गवाही का मूल्य या पहनावे से जुड़े नियम। आलोचक इसे लैंगिक भेदभाव बताते हैं, जबकि समर्थक इसे धार्मिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा मानते हैं।

2022 में महसा आमिनी की मौत के बाद ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उन्हें कथित तौर पर हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इस घटना ने “महिला, जीवन, आज़ादी” (Woman, Life, Freedom) आंदोलन को जन्म दिया। यह आंदोलन केवल हिजाब के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक सुधार की मांग का प्रतीक बन गया। महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमुख मुद्दा बना दिया।

खामेनेई की मौत पर कुछ महिलाओं ने क्यों मनाया जश्न?

खामेनेई के नेतृत्व में लागू सख्त नीतियों के कारण सरकार के आलोचक वर्ग के भीतर असंतोष रहा। इसी पृष्ठभूमि में उनकी मौत की खबर को कुछ लोगों ने “प्रतीकात्मक बदलाव” के रूप में देखा। सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट सामने आए जिनमें “47 साल से इंतज़ार था” जैसे संदेश साझा किए गए। कुछ लोगों के लिए यह शासन-संरचना में संभावित बदलाव की उम्मीद का संकेत था। हालांकि, यह भी सच है कि सभी ईरानी महिलाएं या नागरिक ऐसा महसूस नहीं कर रहे हैं। कई लोगों ने इस घटना को दुखद बताया और बाहरी हमलों या हिंसा पर चिंता जताई है।

विभाजित समाज, जटिल सच्चाई

खामेनेई की मौत पर आई प्रतिक्रियाएं दिखाती हैं कि ईरान का समाज वैचारिक रूप से विभाजित है। जहां एक ओर शोक और सम्मान की भावनाएं हैं, वहीं दूसरी ओर बदलाव और स्वतंत्रता की उम्मीदें भी दिखाई देती हैं। यह घटनाक्रम केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक संघर्षों, महिलाओं के अधिकारों और शासन व्यवस्था से जुड़े लंबे विमर्श का हिस्सा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान की आंतरिक राजनीति और सामाजिक ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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