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वाशिगटन, 2जनवरी, 2021

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पास चीन की आलोचना करने वाला बिल शुक्रवार को तब कानून बन गया जब कांग्रेस ने दो तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के वीटो को खारिज कर इसे पास कर दिया। इस कानून में भारत से लगी वास्तविक सीमा रेखा (LAC) पर चीनी सैन्य आक्रामता की निंदा की गई है।

अमेरिकी कांग्रेस ने 15 दिसम्बर 2020 को 740 अरब डॉलक के डिफेंस पॉलिसी बिल को पास किया था। इस बिल में अमेरिकी कांग्रेस ने भारत के प्रति समर्थन दिखाते हुए भारत लगी एलएसी पर चल रहे तनाव के लिए चीन की आक्रामक गतिविधियों की निंदा की गई थी। कांग्रेस ने चीन से सीमा पर आक्रामकता को खत्म कर कूटनीतिक चैनलों का इस्तेमाल करने को कहा गया था।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने किया था वीटो

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बिल पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए 23 दिसम्बर को इसे वीटो कर दिया था। राष्ट्रपति के वीटो के बाद कोई बिल कानून नहीं बन सकता जब तक कि कांग्रेस दो तिहाई बहुमत से वीटो को खारिज न कर दे। इसके चलते कांग्रेस के वर्तमान सीनेट के अंतिम सत्र के आखिरी दिन इस पर वोटिंग हुई। इस वोटिंग में सीनेट में 81-13 के अंतर से ये बिल पास हो गया जो कि दो तिहाई से ज्यादा है। सीनेट से इस बिल का पास होना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए भी झटका है क्योंकि यहां उनकी रिपब्लिकन पार्टी का प्रभुत्व है। साथ ही डेमोक्रेट प्रभाव वाले अमेरिका के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में भी यह बिल 322-87 के अंतर से पास हो गया।

भारत को अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन

इस बिल के साथ ही अमेरिका ने चीन के साथ अपनी सीमा गतिरोध में भारत को अपना समर्थन दिया है। हालांकि इसमें अभी किसी तरह की कार्रवाई की मांग नहीं की गई है बल्कि यह केवल अमेरिका की समर्थन नीति को दर्शाता है।

15 दिसम्बर को इस बिल में प्रतिनिधि सभा में भारतवंशी सांसद के प्रस्ताव की भाषा को शामिल किया गया जिसमें उन्होंने चीन से भारत के खिलाफ एलएसी पर सैन्य आक्रामकता खत्म करने की मांग की थी। चीन और भारत के बीच पूर्वी लद्दाख में पिछली मई से तनाव बना हुआ है और तब से दोनों देशों ने बड़ी मात्रा में अपने सैनिक तैनात कर रखे हैं। अब तक दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की 8 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन डिसएंगेजमेंट पर सहमति नहीं बन पाई है।