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RJD की अंदरूनी हलचल तेज, हार के बाद संगठन में बड़ा बदलाव संभव, 25 जनवरी को तेजस्वी यादव की भूमिका पर फैसला, पूरी कहानी

RJD की अंदरूनी हलचल तेज, हार के बाद संगठन में बड़ा बदलाव संभव, 25 जनवरी को तेजस्वी यादव की भूमिका पर फैसला, पूरी कहानी

बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर मंथन तेज हो गया है। पार्टी अब सिर्फ हार की समीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि संगठन और नेतृत्व—दोनों स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है। इसी कड़ी में 25 जनवरी को पटना में RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की भूमिका को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

विधानसभा चुनाव की हार से हिला संगठन

हालिया विधानसभा चुनाव में RJD महज 25 सीटों पर सिमट गई थी। यह नतीजा पार्टी की उम्मीदों और चुनावी दावों से बिल्कुल उलट रहा। महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा होने के बावजूद तेजस्वी यादव पार्टी को सत्ता तक नहीं पहुंचा सके। चुनाव नतीजों के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक कमजोरी, रणनीतिक चूक और कुछ सीटों पर भीतरघात जैसे आरोप खुलकर सामने आए।

चुनाव के बाद बढ़ी असहजता

चुनावी हार के बाद तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा को लेकर सत्तापक्ष ने सवाल उठाए, वहीं पार्टी के भीतर भी यह चर्चा रही कि ऐसे समय में संगठन को संभालने की जरूरत थी। हालांकि विदेश से लौटने के बाद तेजस्वी ने खुद मोर्चा संभाल लिया और लगातार बैठकों के जरिए संगठन को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश शुरू की।

लगातार बैठकों से बदला माहौल

विदेश यात्रा से लौटने के बाद तेजस्वी यादव ने पटना स्थित अपने आवास पर दो दिन तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इन बैठकों में हार की वजहों, बूथ लेवल संगठन की कमजोरी, युवा वोटरों से कनेक्ट और पार्टी की सार्वजनिक छवि पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में यह साफ हुआ कि RJD को अब पुराने ढर्रे से बाहर निकलना होगा।

भीतरघात पर कार्रवाई की तैयारी

RJD नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर पार्टी के ही कुछ नेताओं ने संगठन लाइन से हटकर काम किया। ऐसे नेताओं की पहचान की जा चुकी है और 25 जनवरी की बैठक में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है। पार्टी इस संदेश को स्पष्ट करना चाहती है कि आगे किसी भी तरह की अंदरूनी गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

तेजस्वी यादव को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 25 जनवरी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। यह फैसला RJD में औपचारिक नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए संगठन की रोजमर्रा की जिम्मेदारी अब तेजस्वी के हाथ में देने की तैयारी है।

संगठन में बड़े फेरबदल के संकेत

सूत्रों का कहना है कि बैठक में केवल पदों की घोषणा नहीं होगी, बल्कि RJD के संगठनात्मक ढांचे में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। जिला और प्रखंड स्तर पर नए चेहरों को मौका देने, युवाओं को आगे लाने और सोशल मीडिया व डेटा आधारित राजनीति को मजबूत करने पर विचार चल रहा है। पार्टी खुद को ज्यादा आधुनिक और चुनावी रूप से आक्रामक बनाने की योजना पर काम कर रही है।

बिहार यात्रा और जनसंपर्क अभियान

बैठक में तेजस्वी यादव की संभावित बिहार यात्रा को लेकर भी चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू कर सकते हैं, ताकि कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरी जा सके और जनता के बीच पार्टी की खोई जमीन दोबारा तैयार की जा सके।

आगे की राजनीति क्या कहती है?

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर 25 जनवरी की बैठक में तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह RJD के भविष्य की राजनीति तय करने वाला मोड़ होगा। विधानसभा चुनाव की हार के बाद पार्टी अब खुद को रीसेट करने की कोशिश में है। यह बैठक RJD के लिए सिर्फ एक संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नई रणनीति, नया नेतृत्व और नई दिशा की शुरुआत साबित हो सकती है।

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