नई दिल्ली, असम में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के आईएसआई से कथित संबंधों को लेकर उठा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस मुद्दे पर गोगोई ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर जमकर निशाना साधा और कहा कि असम सरकार चाहें तो किसी भी तरह की जांच करा सकती है।
“बीजेपी हार के डर से ध्यान भटका रही” – गोगोई
गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गौरव गोगोई ने कहा,
“हमारी (कांग्रेस) स्थिति शुरू से ही स्पष्ट है कि अगर उन्हें कोई जांच करनी है तो करें। आज से 12 महीने बाद असम में चुनाव होने वाले हैं और यही उनकी चिंता की असली वजह है। उन्हें डर है कि वह अपनी पोस्ट खो देंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की रणनीति अपना रही है। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने की भी बात कही है और जल्द ही इस पर कदम उठाए जाएंगे।
गोगोई का मुख्यमंत्री सरमा पर हमला
गौरव गोगोई ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,
“कल संवाद के दौरान असम के सभी लोगों ने मुख्यमंत्री के चेहरे को देखा। साफ नजर आ रहा था कि वे किसी डर से परेशान हैं। वे हर दिन अपनी स्थिति बदल रहे हैं, क्योंकि वे असम में अपनी हार को लेकर चिंतित हैं।”
उन्होंने आगे कहा,
“पिछले 10 सालों में असम के लोगों ने सरकार से कई सवाल किए, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। अब 2026 के चुनाव में सीएम को जनता को जवाब देना ही होगा। कांग्रेस पूरी एकजुटता के साथ लोगों के मुद्दे उठाएगी और अंत में जनता की जीत होगी।”
ISI लिंक के आरोपों पर असम सरकार का रुख
इससे पहले, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई की पत्नी पर आईएसआई से संबंध होने के आरोपों के बाद कहा था कि असम पुलिस ने अली तौकीर शेख और अन्य के खिलाफ भारत के आंतरिक मामलों और संसदीय मामलों पर कथित टिप्पणी करने को लेकर एफआईआर दर्ज की है।
हालांकि, गोगोई और उनकी पत्नी पर किसी भी तरह का केस दर्ज नहीं किया गया है। असम कैबिनेट ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद गोगोई या उनकी पत्नी के खिलाफ कोई मामला दर्ज न करने का फैसला लिया है।
यह मुद्दा असम की राजनीति में बड़ा विवाद बन चुका है। जहां बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। आने वाले चुनावों से पहले यह मुद्दा कितना बड़ा बनेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।




