धनबाद। राफेल और मल्टीरोल लड़ाकू विमान बनाने वाली फ्रांस की कंपनी दसाल्ट अब भारतीय माइनिंग को तकनीक सहयोग करेगा। दसाल्ट ने आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के टेक्समिन (एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग टेक्नोलाजी इनोवेशन) फाउंडेशन इनोवेशन हब के साथ विश्व स्तरीय सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने के लिए साझेदारी की है। बुधवार को कोलकाता में इस साझेदारी पर दोनों संस्थानों ने हस्ताक्षर किया। अब दसाल्ट माइनिंग के क्षेत्र में टेक्समिन का टेक्नालाजी पाटर्नर बन गया है। इसके तहत एक प्रौद्योगिकी और समाधान भागीदार के रूप में दसाल्ट अपने थ्रीडी प्लेटफार्म के माध्यम से औद्योगिक और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को पूर्ण पिट-टू-पोर्ट आप्टिमाइजेशन के साथ भूवैज्ञानिक माडलिंग और माइन इंजीनियरिंग से लेकर कार्यबल और उत्पादन शेड्यूलिंग, आपूर्ति, अनुभवात्मक शिक्षा प्रदान करेगा।
@IITISM_DHANBAD is elated to share that we have been ranked in Band Excellent in ARIIA Ranking 2021, yet another feather in the cap! Kudos to all the stakeholders for this significant achievement! #achievement #ranking #ariia pic.twitter.com/qfUeVryDAp
थ्रीडी प्लेटफार्म पर आधारित होगा पाठ्यक्रम
IIT (ISM) और दसाल्ट के बीच करार को खनन क्षेत्र के लिए कामी महात्वाकांक्षी माना जा रहा है। माइनिंग के क्षेत्र में मौलिक प्रौद्योगिकी सहायता प्रदान करेगा और खनन और संबद्ध उद्योगों के लिए विशिष्ट भविष्य के कार्यबल तैयार करने में भी सहयोग करेगा। खनन क्षेत्रों में क्षमता और सुरक्षा सर्वोपरि है। यह साझेदारी छात्रों और प्रोफेशनल को सीखने का अवसर के साथ सशक्त बनाएगी। इसके लिए पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रम थ्रीडी प्लेटफार्म पर आभासी दुनिया को मिलाकर तैयार किया जाएगा। इसके अलावा संस्थान के छात्रों को वर्चुअल सिमुलेशन के माध्यम से नौकरी सीखने के माहौल पर अनुभव का अवसर भी मिलेगा।
खनन के क्षेत्र में भविष्य की तैयारी
टेक्समिन आइआइटी धनबाद के सीईओ नरेश सोनी ने कहा कि हम भविष्य के लिए तैयार इनोवेशन तकनीकों के साथ नई पीढ़ी के इनोवेटर्स, स्टार्टअप और पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम मानते हैं कि यह भारत में खनन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा। आज, खनन कंपनियों को अधिक से अधिक आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की कमी के अनुकूल होने की जरूरत है। दसाल्ट सिस्टम्स के प्रबंध निदेशक दीपक एनजी ने बताया कि अकादमिक और उद्योग सहयोग से भारतीय खनन और धातु कंपनियों को डिजिटल परिवर्तन पर उनके वर्तमान कौशल और अपस्किलिंकिंग कार्यक्रमों में मदद मिलेगी और भविष्य के लिए कार्यबल का निर्माण होगा। इस अवसर पर आइआइटी धनबाद के निदेशक प्रो. राजीव शेखर, उपनिदेशक प्रो. शालीवाहन, डीन प्रो. धीरज कुमार के अलावा डसाल्ट के अधिकारी मौजूद थे।
दसाल्ट देगा थ्रीडी तकनीक
दसाल्ट से माडल सेटअप मिलेगा। इससे माइन प्लानिंग, माइन आपरेशन, माइन मानीटरिंग, कैपेसिटी बिल्डिंग किया जाएगा। डसाल्ट के पास माइनिंग जियोविया ब्रांड तकनीक है, जो पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक है। आज भारत में जियोविया तकनीक का उपयोग सीएमपीडीआइ सहित देश की सभी खनन कंपनियां इसका उपयोग कर रही हैं। थ्रीडी मानव प्रगति के लिए एक उत्प्रेरक है। स्थायी नवाचारों की कल्पना करने, व्यापार और लोगों को सहयोगी थ्रीडी आभासी वातावरण प्रदान करते हैं।




