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ईरान–अमेरिका तनाव बढ़ा तो भारत को कितना नुकसान? समझिए पूरा समीकरण

ईरान–अमेरिका तनाव बढ़ा तो भारत को कितना नुकसान? समझिए पूरा समीकरण

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस वक्त अपने चरम पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और Ayatollah Ali Khamenei के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीते 47 सालों में पहली बार इतनी व्यापक सरकार-विरोधी हलचल देखने को मिल रही है।
28 दिसंबर को डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल में तेज गिरावट और बढ़ती महंगाई ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।

अब सवाल उठता है—क्या ईरान में फैली यह अस्थिरता भारत के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर भारत पर पड़ना लगभग तय है, क्योंकि भारत रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर ईरान से गहराई से जुड़ा हुआ है।

भारत के लिए चिंता क्यों बढ़ी?

ईरान में बिगड़ते हालात और अमेरिका के साथ टकराव भारत के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि भारत ने सेंट्रल एशिया, रूस और यूरोप तक पहुंच मजबूत करने के लिए ईरान में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश किया है।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण है Chabahar Port—ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित यह बंदरगाह भारत की रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा है।

चाबहार पोर्ट क्यों है भारत के लिए बेहद अहम?

चाबहार पोर्ट के जरिए भारत पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट के देशों तक सीधे पहुंच बना पाता है। भारत ने इस परियोजना में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है।
यही नहीं, यह बंदरगाह International North-South Transport Corridor (INSTC) का भी अहम हिस्सा है।

INSTC से भारत को क्या फायदा होता है?

करीब 7,000 किलोमीटर लंबा INSTC जहाज, रेल और सड़क मार्गों का नेटवर्क है, जो भारत को ईरान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, आर्मेनिया, रूस और यूरोप से जोड़ता है।
यह रूट स्वेज नहर के मुकाबले छोटा और सस्ता है, जिससे माल ढुलाई में समय और लागत दोनों कम होती हैं। इसका सीधा फायदा भारत के व्यापार और अर्थव्यवस्था को मिलता है।

भारत–ईरान व्यापार पर क्या पड़ेगा असर?

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024–25 में भारत–ईरान व्यापार करीब 1.68 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

  • भारत का एक्सपोर्ट: 1.24 बिलियन डॉलर

  • भारत का इम्पोर्ट: 0.44 बिलियन डॉलर

अगर ईरान में हालात और बिगड़ते हैं या अमेरिका के साथ तनाव बढ़ता है, तो चाबहार पोर्ट के जरिए होने वाली गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर INSTC रूट से जुड़े व्यापार पर भी पड़ेगा, जिससे भारत के एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स प्लान पर दबाव बढ़ सकता है।

ईरान–अमेरिका तनाव केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। यदि हालात लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं, तो भारत की रणनीतिक पहुंच, व्यापार और सप्लाई चेन पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।

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