Semicon India 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में Semicon India 2026 का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने भारत में तेजी से बढ़ रहे सेमीकंडक्टर उद्योग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में अब ‘मेड इन इंडिया’ चिप बन रही है और ये चिप देश के साथ-साथ दुनिया के ग्राहकों तक भी पहुंच रही है। लेकिन सवाल है कि सेमीकंडक्टर आखिर क्या है? भारत अभी चिप कहां से खरीदता है? दुनिया में कौन-कौन से देश चिप बनाते हैं और भारत खुद चिप बनाने पर इतना जोर क्यों दे रहा है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
सेमीकंडक्टर क्या है?
सेमीकंडक्टर को आसान भाषा में इलेक्ट्रॉनिक सामान का बेहद जरूरी हिस्सा समझ सकते हैं। मोबाइल, लैपटॉप, कार, टीवी, मेडिकल उपकरण, टेलीकॉम सिस्टम और डेटा सेंटर जैसे कई उत्पादों में चिप का इस्तेमाल होता है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी नई तकनीकों के बढ़ने के साथ चिप की जरूरत भी बढ़ रही है। यही वजह है कि दुनिया के बड़े देश सेमीकंडक्टर की सप्लाई को लेकर अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
PM मोदी ने क्या कहा?
Semicon India 2026 के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है। इससे देश में निवेश, इनोवेशन और विकास के नए मौके खुल रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय प्लांट्स में बनी चिप अब देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंचने लगी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से भी जोड़ा।
भारत में चिप कब से बन रही है?
Semicon India का पहला संस्करण 2022 में हुआ था। पीएम मोदी के मुताबिक, शुरुआत में पॉलिसी पर चर्चा हुई। इसके बाद प्रोजेक्ट्स, समझौते और प्लांट्स की आधारशिला रखने का काम आगे बढ़ा। इसके बाद पायलट लाइन और टेस्ट चिप्स पर काम हुआ। अब 2026 में फोकस कमर्शियल प्रोडक्शन पर है। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय प्लांट्स से निकलने वाली चिप अब देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने दो और प्लांट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की बात भी कही।
भारत अभी चिप कहां से खरीदता है?
भारत में सेमीकंडक्टर का उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल देश अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। NITI Aayog के मुताबिक, भारत करीब 90-95 फीसदी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की जरूरत आयात से पूरी करता है। भारत के प्रमुख सप्लायर देशों में चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर शामिल हैं।
भारत कितनी चिप आयात करता है?
2024 में इंटीग्रेटेड सर्किट (HS 8542) कैटेगरी में भारत ने करीब 23.8 अरब डॉलर का आयात किया। इस कैटेगरी में चीन से भारत का आयात करीब 10.50 अरब डॉलर रहा। दक्षिण कोरिया से करीब 3.63 अरब डॉलर और जापान से करीब 64.69 करोड़ डॉलर का आयात हुआ। वहीं HS 8541 कैटेगरी में, जिसमें सेमीकंडक्टर डिवाइस, डायोड और ट्रांजिस्टर जैसी चीजें आती हैं, 2024 में भारत का कुल आयात करीब 6.19 अरब डॉलर रहा। इसमें चीन से करीब 4.42 अरब डॉलर, वियतनाम से करीब 56.10 करोड़ डॉलर, मलेशिया से करीब 21.18 करोड़ डॉलर और जापान से करीब 21.14 करोड़ डॉलर का आयात हुआ।
किन देशों से आती हैं चिप?
2024 के उपलब्ध व्यापार आंकड़ों के मुताबिक, भारत के प्रमुख चिप आयात स्रोतों में ये देश शामिल हैं:
| देश | भारत का आयात |
|---|---|
| चीन | करीब 10.50 अरब डॉलर |
| दक्षिण कोरिया | करीब 3.63 अरब डॉलर |
| जापान | करीब 64.69 करोड़ डॉलर |
| मलेशिया | करीब 49.31 करोड़ डॉलर |
| सिंगापुर | करीब 44.59 करोड़ डॉलर |
यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े संबंधित इंटीग्रेटेड सर्किट कैटेगरी के हैं। इन्हें भारत के सभी तरह के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के कुल आयात का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
दुनिया में चिप कौन बनाता है?
दुनिया में कई देश सेमीकंडक्टर से जुड़े काम करते हैं, लेकिन कुछ देश इस क्षेत्र में खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। ताइवान एडवांस्ड चिप बनाने के लिए जाना जाता है। दक्षिण कोरिया मेमोरी चिप के क्षेत्र में बड़ा केंद्र है। चीन बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभाता है। अमेरिका चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है। जापान सेमीकंडक्टर बनाने में इस्तेमाल होने वाले मटेरियल और उपकरणों की सप्लाई में बड़ी भूमिका निभाता है। इसके अलावा मलेशिया, सिंगापुर और वियतनाम भी चिप की असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग में महत्वपूर्ण हैं।
दुनिया की चिप इंडस्ट्री कितनी बड़ी है?
OECD के मुताबिक, चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका मिलकर दुनिया की करीब 90 फीसदी wafer fabrication capacity रखते हैं। 2024 के value-added semiconductor manufacturing आंकड़ों में चीन की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी, ताइवान की 22 फीसदी, अमेरिका की 19 फीसदी और दक्षिण कोरिया की 11 फीसदी थी। यानी दुनिया में चिप बनाने की क्षमता कुछ प्रमुख देशों में काफी ज्यादा केंद्रित है।
भारत खुद चिप क्यों बनाना चाहता है?
इसका सबसे बड़ा कारण है आयात पर निर्भरता कम करना। चिप अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर में इस्तेमाल नहीं होती। कार, इलेक्ट्रिक वाहन, टेलीकॉम, मेडिकल उपकरण, डेटा सेंटर, AI और डिफेंस जैसे कई क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर जरूरी है। अगर किसी वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो इसका असर इन सेक्टरों पर भी पड़ सकता है। इसीलिए भारत घरेलू स्तर पर चिप बनाने की क्षमता बढ़ाना चाहता है।
भारत में क्या-क्या बनाया जा रहा है?
भारत की कोशिश सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है। सरकार सेमीकंडक्टर से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को देश में विकसित करने पर जोर दे रही है। इसमें चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मटेरियल और सप्लाई चेन शामिल हैं। पीएम मोदी ने कंपाउंड सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन फोटोनिक्स जैसी तकनीकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये AI आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी हैं।
अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने Semicon 2.0 के लक्ष्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को शामिल करने का लक्ष्य है, जो भारत की जरूरत के मुताबिक चिप डिजाइन पर काम करेंगी। इसके अलावा मशीनों और मटेरियल, डिस्प्ले, मेमोरी, सिलिकॉन, कंपाउंड और लॉजिक जैसे क्षेत्रों पर भी फोकस किया जा रहा है। एडवांस्ड पैकेजिंग यूनिट्स को भी इस पूरे इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बताया गया है।
भारत के लिए आगे की चुनौती क्या है?
भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन ग्लोबल स्तर पर मजबूत स्थिति बनाने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। भारत को सिर्फ चिप बनाने की क्षमता नहीं बढ़ानी होगी, बल्कि डिजाइन से लेकर पैकेजिंग और सप्लाई चेन तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करना होगा। Semicon India 2026 में पीएम मोदी का जोर इसी व्यापक इकोसिस्टम पर रहा। भारत का लक्ष्य अब सिर्फ चिप का बड़ा बाजार बने रहना नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाना है।




