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नई दिल्ली, 28 मई 2021

दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर में 12 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के तत्काल टीकाकरण की मांग करने वाली एक 12 वर्षीय एक बच्ची की याचिका पर शुक्रवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। अधिवक्ता बिहू शर्मा के माध्यम से टिया गुप्ता द्वारा दायर याचिका में यह भी मांग की गई है कि 17 वर्ष तक के बच्चों के माता-पिता के लिए भी टीकाकरण को प्राथमिकता दी जाए।
दलील में कहा गया है कि दिल्ली सहित देश भर के आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल-मई के बीच कोविड-19 से संक्रमित और पीड़ित बच्चों के रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या काफी बढ़ गई है।
याचिका में कहा गया है कि बच्चों को कोविड-19 टीकों का लाभार्थी होने का मौलिक अधिकार है, जो कि संक्रमण से बचने के लिए एक आसान, कम लागत वाला तरीका माना जा रहा है और जो बच्चों को गंभीर नुकसान या उनकी मृत्यु होने से बचा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका में कहा गया है कि बिना टीकाकरण वाले बच्चों में एक नया, अधिक शक्तिशाली कोविड-19 स्ट्रेन विकसित होने की संभावना है, जो कि दूसरी लहर में परिलक्षित भी हुआ है, जिसने पिछले साल आई पहली लहर की तुलना में अब कई अधिक बच्चों को संक्रमित किया है।
याचिका में कहा गया है, प्रतिवादी आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 (डीएम अधिनियम) के तहत तैयार किए गए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना 2019 के तहत दिए गए दिशानिर्देशों के पालन में बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार करने में विफल रहे हैं।