Gyanvapi Dispute: ज्ञानवापी केस में गुरुवार को वाराणसी लोअर कोर्ट का फैसला आ सकता है। वाराणसी सिविल कोर्ट में सभी पक्षों की सुनवाई 3 दिन में पूरी हो गई थी। इसके बाद बुधवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की याचिका पर एडवोकेट कमिश्नर बदले जाने को लेकर सुनवाई हुई थी। आखिर क्या है ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ मंदिर का विवाद, आइए जानते हैं पूरा मामला।
अयोध्या से मिलता-जुलता है ज्ञानवापी का मामला :
ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर का विवाद कुछ-कुछ अयोध्या मामले की तरह ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि अयोध्या के मामले में मस्जिद बनी थी जबकि वाराणसी में मंदिर-मस्जिद दोनों ही बने हुए हैं। काशी विवाद में हिंदू पक्ष का कहना है कि 1669 में औरंगजेब ने यहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। वहीं, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यहां मंदिर कभी था ही नहीं बल्कि वहां शुरुआत से ही मस्जिद थी।
आखिर क्यों हुआ विवाद :
बता दें कि 5 अगस्त, 2021 को कुछ महिलाओं ने वाराणसी की लोकल कोर्ट में एक याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर समेत कई विग्रहों में पूजा करने की अनुमति देने और सर्वे कराने की मांग की थी। इसी याचिका पर कोर्ट ने यहां सर्वे करने की अनुमति दी थी। हालांकि, जब टीम सर्वे करने पहुंची तो वहां मुस्लिम पक्ष के लोगों ने उन्हें मस्जिद की वीडियोग्राफी करने से रोक दिया।
ज्ञानवापी विवाद में कब-कब क्या हुआ :
1991 : भगवान विश्वेश्वर की ओर से वाराणसी कोर्ट में पहली याचिका दायर हुई। याचिकाकर्ता ने ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने की इजाजत कोर्ट से मांगी।
1998 : ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना ठीक समझा। कमेटी ने कहा कि इस मामले में सिविल कोर्ट कोई फैसला नहीं ले सकती। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सिविल कोर्ट में सुनवाई पर रोक लग गई।
2019 : भगवान विश्वनाथ की तरफ से विजय शंकर रस्तोगी ने वाराणसी कोर्ट में याचिका लगाई। इसमें ज्ञानवापी परिसर का सर्वे आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) से कराने की मांग की गई।
2020 : ज्ञानवापी की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने ASI के सर्वे का विरोध किया। 2020 में ही रस्तोगी ने लोअर कोर्ट में याचिका लगाते हुए मामले की सुनवाई फिर से शुरू करने की मांग की।
2022 : अप्रैल, 2022 में कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया और इसी आधार पर अब ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण किया जाना है।




