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नई दिल्ली, 20 मई 2021

भारत में कोरोनावायरस महामारी की दूसरी लहर का कहर अभी भी जारी है। इस बीच संक्रमण को कम करने के लिए केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए जरूरी सावधानियां बरतने को कहा है।

इसके मुताबिक संक्रमण एरोसोल और ड्रॉपलेट्स के जरिए तेजी से फैल रहा है और छींकने से निकला एरोसोल हवा में 10 मीटर की दूरी तक जा सकता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के 2 मीटर के दायरे में ड्रॉपलेट्स गिरती है।

परामर्श में लोगों को दो मास्क या एन 95 मार्का मास्क पहनने को कहा गया है।

इसके अलावा हवादार स्थानों के महžव को रेखांकित किया गया है। घरों में हवा आने-जाने की समुचित व्यवस्था होने से वायरल लोड कम होता है, जबकि जिन घरों, कार्यालयों में हवा के आने-जाने का उचित प्रबंध नहीं होता, वहां वायरल लोड ज्यादा होता है। हवादार स्थान होने के कारण संक्रमण एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने का जोखिम कम हो जाता है।

जिस तरह खिड़की-दरवाजे खोलने से हवा के जरिए महक हल्की हो जाती है, उसी तरह एक्जॉस्ट प्रणाली, खुले स्थान और हवा के आने-जाने की व्यवस्था से हवा में व्याप्त वायरल लोड कम हो जाता है और संक्रमण का जोखिम घट जाता है।

प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है, हवा के आने-जाने की व्यवस्था एक बेहतरीन सुरक्षा है, जिसके कारण घरों और दफ्तरों में हमें सुरक्षा मिलती है। कार्यालयों, घरों और बड़े सार्वजनिक स्थानों को हवादार बनाने से बाहर की हवा मिलती है। इसलिए ऐसा करने की सलाह दी गई है।

शहरों और गांवों, दोनों जगह ऐसे स्थानों को हवादार बनाने के उपाय तुरंत किए जाने चाहिये। इसी तरह घरों, कार्यालयों, कच्चे घरों और विशाल इमारतों को भी हवादार बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए। पंखों को सही जगह लगाना, खिड़की-दरवाजे खोलकर रखना बहुत सरल उपाय हैं। अगर थोड़ी सी भी खिड़की खोलकर रखी जाए, तो उतने भर से ही बाहर की हवा मिलेगी और भीतर की हवा की गुणवत्ता बदल जाएगी। क्रॉस-वेंटीलेशन और एक्जॉस्ट फैन से भी रोग के फैलाव को रोका जा सकता है।

जिन बड़ी इमारतों में हवा के लिए कोई प्रणाली लगी हो, वहां हवा को साफ रखने और हवा के बहाव को बढ़ाने के लिये फिल्टर लगाए जाने चाहिए। इससे बाहर से सीमित मात्रा में आने वाली हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है। दफ्तरों, शॉपिंग मॉल आदि में गेबल-फैन प्रणाली और रौशनदानों की सिफारिश की गई है।

कोविड वारयस हवा के जरिये फैलता है। जब कोई संक्रमित बोलता, गाता, हंसता, खांसता या छींकता है, तो वायरस थूक या नाक के जरिए हवा में तैरते हुये स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंच जाते हैं। संक्रमण के फैलने का यह पहला जरिया है। इसलिए लोगों को दो मास्क या एन 95 मार्का मास्क पहनना चाहिए।

कोविड-19 का वायरस मानव शरीर में घुसकर अपनी तादाद बढ़ाता जाता है। अगर उसे मानव शरीर न मिले, तो वह जीवित नहीं रह सकता। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण को रोकने से विषाणु मर जाता है। यह काम व्यक्तियों, समुदायों, स्थानीय निकायों और अधिकारियों के सहयोग और समर्थन से संभव हो पाएगा। मास्क, हवादार स्थान, सामाजिक दूरी और स्वच्छता ऐसे हथियार हैं, जिनसे हम वायरस के खिलाफ जंग जीत सकते हैं।