बिहार में उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या से सनसनी, JDU नेता श्याम रजक बोले – “हमने एक अच्छा दोस्त खो दिया”

Bihar News: राजधानी पटना में शुक्रवार देर रात एक बड़ी आपराधिक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। बिहार के प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी गोपाल खेमका की रामगुलाम चौक स्थित अपार्टमेंट के पास सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया गया कि जैसे ही वे अपनी गाड़ी से उतरे, पहले से घात लगाए अपराधियों ने उन्हें निशाना बना लिया।

इस निर्मम हत्या से बिहार के व्यवसायिक और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है। खेमका को गोली मारने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

पहले बेटे की हत्या, अब पिता की हत्या – खेमका परिवार पर दोहरा हमला

खेमका परिवार इससे पहले भी एक बड़ी त्रासदी झेल चुका है। साल 2018 में गोपाल खेमका के बड़े बेटे गुंजन खेमका की हत्या कर दी गई थी। वही कार्टन फैक्ट्री का संचालन करते थे। अब गोपाल खेमका की हत्या ने पूरे परिवार को फिर एक बार सदमे में डाल दिया है। ख़बरों की मानें तो, उनके छोटे बेटे पर भी हमला हुआ था, लेकिन वह बाल-बाल बच गए।

श्याम रजक का भावुक बयान – “एक अच्छा दोस्त खो दिया”

जेडीयू के महासचिव श्याम रजक ने खेमका की हत्या पर शोक व्यक्त करते हुए कहा:  “सवाल यह नहीं है कि किसे किसने निशाना बनाया। असली सवाल यह है कि मैंने एक अच्छा दोस्त, एक सफल व्यवसायी, एक समर्पित समाजसेवी और कई लोगों के दिलों में जगह रखने वाला व्यक्ति खो दिया है। ऐसे व्यक्ति का जाना हम सभी के लिए बेहद दुखद है।”


पुलिस पर गंभीर आरोप – “क्या पुलिस सो रही थी?”

घटना के बाद गोपाल खेमका के भाई शंकर खेमका ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा: “थाना क्या कर रहा था? सो रहा था या ड्यूटी कर रहा था? बुलेट की आवाज सुनाई नहीं दी? 1:33 पर गांधी मैदान पुलिस पहुंची, दो बजे SDPO और फिर ढाई बजे के करीब एसपी आईं। वे ऐसे खड़ी थीं जैसे कोई तमाशा देख रही हों।”


एसआईटी का गठन, डीजीपी ने दिए सख्त निर्देश

इस हाई-प्रोफाइल हत्या मामले में बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने एसआईटी (SIT) के गठन के आदेश दिए हैं। जांच की कमान सेंट्रल एसपी दीक्षा को सौंपी गई है, जो पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रही हैं। फिलहाल पुलिस घटनास्थल से सबूत जुटा रही है और अपराधियों की तलाश जारी है।


क्या कहता है यह क़त्ल बिहार की कानून व्यवस्था के बारे में?

पाटलिपुत्र की इस घटना ने फिर एक बार पुलिस और प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यवसायिक समुदाय में भय है, और राजनीतिक गलियारों में नाराजगी। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि प्रशासन इस वारदात को कितनी तेजी और गंभीरता से सुलझा पाता है।

 

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