लखनऊ, कर्नाटक हिजाब मामला जनवरी से चल रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश के पहले चरण की वोटिंग से पहले ये मामला एकदम से गरमा गया। वैसे तो इस घटना का यूपी चुनाव से कोई तारतम्य नहीं दिखता है लेकिन अगर ध्यान देकर समझें तो पूरा माजरा समझ आ जाएगा. हिजाब विवाद की राजनीति को समझने के लिए उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार में पिछले दो दिनों से एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के भाषणों में कही जाने वाली बातों पर गौर करने की जरूरत है। आइए ओवैसी के संभल और मुरादाबाद में दिए गए भाषणों में कही गई कुछ पंक्तियों पर नजर डालते हैं।
संभल रैली में ओवैसी ने कहा, “हमारी एक बहादुर बेटी कर्नाटक में हिजाब पहनकर मोटरसाइकिल पर आती है। तमाम युवक उसको डराने के लिए नारे लगाते हैं। मैं सलाम करता हूं उस बेटी की बहादुरी को, मैं सलाम करता हूं उस बेटी के मां-बाप को। यह आसान काम नहीं था जब उस बच्ची ने हिम्मत दिखाकर नारेबाजी कर रहे नौजवानों को जवाब दिया। हम आपको बताने आए हैं कि आप डरिए मत, हौंसले को बुलंद रखिए। अगर और हौंसला बुलंद करना है तो कर्नाटक के बच्ची के हिम्मत वाला वीडियो सोशल मीडिया पर देखिए।”
मुरादाबाद की बिलारी की रैली में ओवैसी कहते हैं, “आप बताओ उस बच्ची ने हिम्मत का मुजायरा किया या नहीं, क्या उसकी हिम्मत देखकर मां-बाप का हिम्मत से सीना चौड़ा नहीं हुआ। जो हमारी मां और बहनें हिजाब पहनती हैं वो वोट डालने वही पहनकर जाएं।”
ओवैसी के दोनों भाषणों की पंक्तियों से साफ है कि वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता को क्या मैसेज देना चाहते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी से चल रहा है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वोटिंग से ठीक पहले इस मुद्दे को गरमाया गया है। एक तरफ ओवैसी जन सभाओं में कर्नाटक की उस बच्ची की ओर से लगाए गए नारे का बार-बार जिक्र कर रहे हैं वहीं दूसरे पक्ष के लोग अपने हिसाब से इस मुद्दे को हवा देने में जुटे हैं।
पिछले दो-तीन दिनों से सोशल मीडिया पर कर्नाटक के मांड्या की छात्रा मुस्कान के ‘अल्लाह हू अकबर’ नारेबाजी वाले वीडियो को खूब प्रमोट किया जा रहा है। इसके जवाब में ‘जय श्री राम’ के नारे वाले वीडियो को भी वायरल किया जा रहा है। इतना ही नहीं हिजाब से जुड़े दूसरे वीडियो को भी प्रचारित किया जा रहा है। ओवैसी जैसे नेता मंच से लोगों को मांड्या की छात्रा मुस्कान का वीडिया वायरल करने को प्रेरित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, बिलारी की रैली में खुद ओवैसी मंच से कह रहे हैं कि मांड्या में नारेबाजी करने वाली छात्रा और उसके पिता से उनकी बातचीत होती है। वह वीडियो कॉल पर उनसे बाते करते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले चरण की वोटिंग और मांड्या के छात्रा की नारेबाजी की घटना की कड़ी आपस में जुड़ी है।
यूपी चुनाव के पहले चरण में मुस्लिम निर्णायक
पहले चरण का चुनाव पश्चिमी यूपी से हो रहा है, जो मुस्लिम बहुल माना जाता है. यूपी चुनाव में पहले चरण में 58 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जिसमें मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और अमरोहा जिले शामिल हैं। ये ऐसे जिले हैं जहां मुस्लिमों की 40 फीसदी आबादी है। पहले चरण में जिन सीटों पर वोटिंग हो रही है उसमें मुस्लिम करीब 27 फीसदी, दलित 25 फीसदी, जाट 17 फीसदी, राजपूत 8 फीसदी और यादव करीब 7 फीसदी माने जा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का भी खासा प्रभाव माना जा रहा है। बीजेपी जाट वोटरों को एक बार फिर से मनाने के लिए हर संभव दावे कर रही है। वहीं समाजवादी पार्टी और आरएलडी गठबंधन जातीय समीकरण और मुस्लिमों के एकजुट वोटों से उम्मीदें लगाए हैं।
यूपी चुनाव के पहले चरण में मुस्लिम प्रत्याशी
पहले चरण के 11 जिलों की 58 सीटों में से कई सीटों पर प्रमुख दलों के करीब 50 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में हैं. सपा-रालोद गठबंधन के 13, बीएसपी के 17, कांग्रेस के 11 और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन के 9 मुस्लिम उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं, बीजेपी ने किसी भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया. अभी तक जो दिग्गज मुस्लिम नेता पश्चिमी यूपी की सियासत की धुरी थे, वो इस बार चुनावी मैदान से बाहर है.
पहला चरण के जिलों में मुस्लिम आबादी
पहले चरण के जिन 11 जिलों की 58 सीटों पर चुनाव है, वहां पर मुस्लिम वोटर काफी अहम है. मेरठ में 34.43 फीसदी, बागपत में 27.98 फीसदी, शामली में 41.73 फीसदी, मुजफ्फरनगर में 40 फीसदी, हापुड़ में 32.39 फीसद, गाजियाबाद में 22.53 फीसदी, नोएडा में 13.08 फीसदी, बुलंदशहर में 22.22 फीसद, मथुरा में 15.2 फीसदी और आगरा में 12 फीसदी मुस्लिम आबादी है.




