बिहार में बाबाओं की एंट्री: चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी ,किसके लिए बन रहा माहौल?

बिहार में बाबाओं की एंट्री: चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी ,किसके लिए बन रहा माहौल?

बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, और जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे धार्मिक गुरुओं की बिहार में एंट्री भी हो रही है। हाल ही में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के बिहार दौरे ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। सवाल यह उठ रहा है कि इन बाबाओं की एंट्री चुनावी माहौल को किस दिशा में ले जाएगी और क्या यह हिंदुत्व की सियासत को धार देने की कोशिश है?

धीरेंद्र शास्त्री का गोपालगंज में डेरा
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस समय गोपालगंज में हनुमंत कथा कर रहे हैं। यह वही क्षेत्र है, जिसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू यादव का गढ़ माना जाता है। कथा के दौरान शास्त्री ने कहा कि वे “देश के 150 करोड़ हिंदुओं की लड़ाई लड़ने” आए हैं। उन्होंने हिंदू एकता की बात करते हुए संकेत दिया कि वे किसी पार्टी के लिए वोट नहीं मांगते, लेकिन हिंदुओं को जागरूक करने आए हैं। उनका यह बयान हिंदुत्व की राजनीति को बिहार में धार देने का संकेत माना जा रहा है।

श्री श्री रविशंकर का बिहार दौरा और शिवलिंग की राजनीति
श्री श्री रविशंकर भी बिहार पहुंचे हैं और वे यहां एक ऐतिहासिक शिवलिंग लेकर आए हैं, जिसे 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने खंडित किया था। इसे सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया है। इसके अलावा, उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात की और बिहार के विकास की तारीफ की। बीजेपी इस यात्रा को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर सकती है, क्योंकि हिंदुत्व से जुड़े मुद्दे बीजेपी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत का एजेंडा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी पांच दिनों के बिहार दौरे पर हैं। वे स्वयंसेवकों और बीजेपी नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं और हिंदू एकता के संदेश दे रहे हैं। उन्होंने बिहारवासियों की मेहनत और समर्पण की प्रशंसा करते हुए दशरथ मांझी का उदाहरण दिया, जो राजनीतिक रूप से एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

जातीय बनाम धर्म की राजनीति
बिहार की राजनीति अब तक जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। बीजेपी अब इसे बदलकर हिंदू एकता के जरिए सत्ता पाने की कोशिश में है। संघ और बीजेपी की कोशिश है कि अलग-अलग जातियों में बंटे हिंदू वोटों को एकजुट किया जाए। इसीलिए धीरेंद्र शास्त्री, श्री श्री रविशंकर और मोहन भागवत के दौरे को बीजेपी की चुनावी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

क्या बाबाओं के सहारे बिहार फतह करेगी बीजेपी?
आरजेडी और कांग्रेस का मानना है कि बीजेपी धार्मिक एजेंडा सेट कर चुनावी फायदा लेना चाहती है। हालांकि, बीजेपी इस बात से इनकार करती है और इसे महज संयोग बताती है। लेकिन जिस तरह से धार्मिक गुरुओं का बिहार दौरा हो रहा है और हिंदुत्व को लेकर बयान दिए जा रहे हैं, उससे साफ है कि चुनाव से पहले बिहार में धर्म बनाम जाति की राजनीति तेज होगी।

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