फूलों से नहीं नोटों से सजता है बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, 22 सदस्यों ने जमा किए 1 करोड़ 21 लाख

फूलों से नहीं नोटों से सजता है बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, 22 सदस्यों ने जमा किए 1 करोड़ 21 लाख

उज्जैन: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन के पास स्थित श्री बुद्धेश्वर महादेव मंदिर महाशिवरात्रि के अवसर पर अपनी अनूठी सजावट के लिए चर्चा में है। इस वर्ष मंदिर को एक करोड़ 21 लाख रुपए के नोटों से श्रृंगारित किया गया, जिससे यह स्थान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है। नोटों से की गई यह भव्य सजावट भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का विशेष प्रतीक बन गई है।

चार वर्षों से निभाई जा रही यह अनोखी परंपरा
बड़नगर में स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर को पहले फूलों और पारंपरिक सजावट से श्रृंगारित किया जाता था, लेकिन पिछले चार वर्षों से श्रद्धालु नकदी से सजावट की अनूठी परंपरा निभा रहे हैं। वर्ष 2021 में जब पहली बार मंदिर को 7 लाख रुपए के नोटों से सजाया गया, तब से हर वर्ष यह राशि बढ़ती गई। 2022 में 11 लाख, 2023 में 21 लाख और 2024 में 51 लाख रुपए से मंदिर को सजाया गया था। इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर एक करोड़ 21 लाख पर पहुंच गया, जो अब तक की सबसे बड़ी धनराशि है।

नोटों से की गई भव्य सजावट
इस विशेष सजावट के लिए मंदिर के गर्भगृह, मंडप और प्रवेश द्वार को आकर्षक रूप से सजाया गया। नए और कड़क नोटों से मंदिर के विभिन्न भागों पर मालाएं, मुकुट और झूमर बनाए गए। मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु के अनुसार, इस भव्य श्रृंगार को देखने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का प्रतीक भी बन चुका है।

22 श्रद्धालुओं ने जुटाए 1 करोड़ 21 लाख रुपए
मंदिर की यह भव्य सजावट श्री बुद्धेश्वर महादेव मित्र मंडली द्वारा करवाई जाती है। इस वर्ष मंडली के 22 सदस्यों ने मिलकर एक करोड़ 21 लाख रुपए की धनराशि एकत्रित की, जिससे इस अद्भुत श्रृंगार को संभव बनाया जा सका। भक्तों के इस योगदान और सेवा भाव से यह आयोजन भव्य और भक्ति से परिपूर्ण बन जाता है।

तीन दिनों तक जारी रहेगी नोटों की सजावट
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में 28 फरवरी से 10 मार्च तक मंदिर में विशेष मेला आयोजित किया गया है। हालांकि, नोटों से की गई यह भव्य सजावट केवल तीन दिनों के लिए रखी गई है। इसी कारण, सुबह से देर रात तक भक्तों की भारी भीड़ मंदिर में उमड़ रही है।

भविष्य में नए रिकॉर्ड बनाने की संभावना
श्रद्धालुओं का कहना है कि जिस तरह हर साल सजावट की राशि बढ़ रही है, उसे देखते हुए भविष्य में यह परंपरा और भी बड़े स्तर पर आयोजित की जा सकती है। मंदिर की यह अनूठी परंपरा न केवल उज्जैन और मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। भक्तों का विश्वास है कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन नई ऊंचाइयों को छू सकता है और मंदिर की प्रतिष्ठा को और बढ़ा सकता है।

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