नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष रोक्साना मिंजातु से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एकेडमिक, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधान ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया मंच X पर साझा की और इसे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने वाला कदम बताया।
शिक्षा और कौशल विकास पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत-ईयू साझेदारी को और अधिक सक्रिय बनाने तथा नए प्रतिमान स्थापित करने पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), छात्रों की दो-तरफा गतिशीलता, फैकल्टी और शिक्षक आदान-प्रदान, तथा ड्यूल डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के तरीकों पर बातचीत की।
रोक्साना मिंजातु ने इस बैठक में यूरोपीय संघ के प्रमुख शैक्षिक कार्यक्रमों, जैसे इरास्मस और होराइजन, के बारे में जानकारी दी और बताया कि कैसे भारत इनसे अधिक लाभ उठा सकता है।
नई शिक्षा नीति और कौशल विकास पर जोर
प्रधान ने बताया कि भारत और ईयू ने आपसी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नीतिगत संवाद स्थापित करने की सहमति जताई। उन्होंने कहा, “हमने सीखने और स्किल डेवलपमेंट में सुधार के लिए और अधिक सहयोग पर चर्चा की। मुझे विश्वास है कि यह बैठक भारत-ईयू शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।”
इस संदर्भ में, प्रधान ने भारत की नई शिक्षा नीति (NEP) का भी जिक्र किया, जो कौशल विकास पर विशेष जोर देती है। उन्होंने हाल ही में एक शिक्षा सम्मेलन में कहा था कि NEP के तहत मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने, व्यावसायिक प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने और कोचिंग संस्थानों के लिए गाइडलाइंस जारी करने जैसे कदम उठाए गए हैं।
भारत-ईयू रणनीतिक सहयोग को मिलेगा नया आयाम
भारत और यूरोपीय संघ के बीच शिक्षा, रिसर्च और कौशल विकास में सहयोग बढ़ाने से छात्रों और शिक्षाविदों को वैश्विक अवसरों का लाभ मिलेगा। इस बैठक से दोनों पक्षों के बीच ज्ञान साझेदारी को मजबूती मिलेगी और भविष्य में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।




