पश्चिम बंगाल में रामनवमी के अवसर पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया है। पिछले वर्षों में हुई हिंसात्मक घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर इस बार सुरक्षा इंतजाम बेहद सख्त किए गए हैं। पूरे राज्य में लगभग 250 रामनवमी जुलूस निकाले जाने की संभावना है, जिनकी निगरानी के लिए पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
राज्य सचिवालय नबान्न रविवार को भी खुला रहेगा, जबकि सामान्यतः यह दिन अवकाश का होता है। एडीजी कानून-व्यवस्था जावेद शमीम स्वयं कंट्रोल रूम से हालात पर नजर रखेंगे। जुलूसों के समय सभी वरिष्ठ अधिकारी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे और 9 अप्रैल तक पुलिसकर्मियों की सभी छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
पुलिस ने राज्य के 10 संवेदनशील जिलों – हावड़ा, बैरकपुर, चंदननगर, मालदा, इस्लामपुर, आसनसोल-दुर्गापुर, सिलीगुड़ी, हावड़ा ग्रामीण, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार – में 29 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की विशेष तैनाती की है। इनमें हावड़ा जिले को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जहां पूर्व में रामनवमी के दौरान हिंसक घटनाएं सामने आई थीं।
कोलकाता में 6000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। हेस्टिंग्स, चितपुर, रामलीला मैदान, बॉन्डेल गेट और खिदिरपुर जैसे प्रमुख इलाकों में पुलिस पिकेट स्थापित किए गए हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से जुलूसों की हवाई और स्थलीय निगरानी की जा रही है। छोटे जुलूसों में पुलिस एस्कॉर्ट्स बॉडी कैमरों से लैस होंगे।
कोलकाता पुलिस ने त्वरित कार्रवाई के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), हैवी रेडियो फ्लाइंग स्क्वॉड (HRFS) और पुलिस कंट्रोल रूम वैन को सक्रिय कर दिया है। साथ ही, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी ऊंची इमारतों से निगरानी करेंगे। शहर में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति तैयार की गई है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि रामनवमी के उत्सव में धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाएगा, लेकिन किसी भी प्रकार की उग्रता या भड़काऊ गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तय मार्गों से बाहर कोई भी जुलूस नहीं निकल सकेगा और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एहतियात के तौर पर कोलकाता में 6 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से मध्यरात्रि तक भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, आवश्यक सेवाओं जैसे दूध, सब्जी और ईंधन की आपूर्ति को इससे छूट दी गई है।
मुख्य सचिव मनोज पंत की अध्यक्षता में शनिवार को नबान्न में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें रामनवमी के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रणनीति तय की गई। सभी डीसीपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने बलों को पूरी तैयारी के साथ तैनात करें और सुरक्षात्मक उपकरणों से लैस रखें।
ड्रोन से निगरानी, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, सादी वर्दी में अधिकारी, ऊंची इमारतों से नजर, नबान्न से सीधे नियंत्रण – पश्चिम बंगाल में रामनवमी के पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए सरकार और पुलिस ने इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी है।




