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नई दिल्ली, 11जनवरी 2021

यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए पहला वेटलैंड (Wetlands) महारानी बाग के पास बनाया गया है. इसके अलावा 11 अन्य वेटलैंड्स भी अगले 6 महीनों में काम करना शुरू कर देंगे.

यमुना नदी (Yamuna River) में हर रोज दिल्ली के 25 बड़े नालों का पानी गिरता है. तकरीबन 1500 मीलियन लीटर गंदा पानी इन नालों में आता है. हालांकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में ट्रीट होने के बाद ही यह नाले यमुना में गिरते हैं. बावजूद इसके यमुना प्रदूषित (Pollution) बनी रहती है. लेकिन अब बिना एसटीपी के साथ यमुना को स्वच्छ बनाया जा सकेगा. इसके लिए यमुना में वेटलैंड (Wetland) बनाने की शुरुआत हो गई है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एनवायरमेंटल मैनेजमेंट ऑफ डिग्रेडेड इकोसिस्टम्स विभाग की ओर से यमुना में वेटलैंड बनाने का काम किया जा रहा है. विभाग के सीनियर प्रोफेसर सीआर बाबू की निगरानी में यह काम किया जा रहा है.

उनका कहना है कि वेटलैंड से यमुना में गिरने वाले नाले के पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाएगा. इस तरीके से डिजर्टेंट समेत तमाम हानिकारक केमिकल भी फिल्टर हो जाते हैं. और सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए किसी भी तरह से बिजली का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है.

महारानी बाग के पास डीडीए के दक्षिणी दिल्ली बायोडायवर्सिटी पार्क में नवनिर्मित वेटलैंड (नम भूमि) यमुना को गंदा होने से बचाने में कारगर साबित होगा. यह वेटलैंड यमुना में गिरने वाले गंदे पानी को शुद्ध करेगा. बता गौरतलब रहे महारानी बाग नाले से रोजाना 250 से 500 एमएलडी सीवेज पानी यमुना में गिरता है जो अब साफ हो सकेगा. सरकार का प्लान जल्द ही इस योजना के तहत 11 और वेटलैंट तैयार करने का है.

महारानीबाग के पास निर्मित वेटलैंड पर 25 हजार से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं. हरियाली बढ़ने से पार्क में नए पक्षी आने की भी उम्मीद है. पानी साफ होगा तो यमुना से लुप्त हो चुकी मछलियों के भी फिर से आने की संभावना है. शेष 11 वेटलैंड का काम भी 50 फीसदी पूरा हो गया है. छह महीने में ये सब भी काम करना शुरू कर देंगे.