जोशीमठ में भवनों में आ रही दरारों से मची अफरातफरी के बीच एक अच्छी खबर है। रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) के वैैज्ञानिक जोशीमठ में सभी तरह के खतरों को सहने में सक्षम आवासीय कॉलोनी का निर्माण करेंगे। खास बात यह है कि अलग-अलग फेज में बनने वाली इन कॉलोनियों को चुनौतीपूर्ण साइट पर बनाया जाएगा। ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि डीप स्लोप वाली जगहों पर भी तकनीक के जरिये सुरक्षित घर बनाए जा सकते हैं।
जोशीमठ में एनएचपीसी (नेशनल हाईड्रो पॉवर कॉरपोरशन) लिमिटेड की ओर से सीबीआरआई रुड़की से कॉलोनियों के निर्माण के लिए तकनीक एवं निर्माण सहायता मांगी गई है। एक प्रोजेक्ट के तहत इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है। प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया और एसके नगी अलग-अलग फेज में बनने वाली आवासीय कॉलोनी का डिजाइन एलीवेशन, प्लानिंग, स्ट्रक्चरल डिजाइन समेत सभी तरह की निर्माण तकनीकी देंगे। छह माह के भीतर काम पूरा कर लिया जाएगा। जल्द ही इसके लिए साइट विजिट की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जहां कॉलोनियों का निर्माण होगा, उसके लिए चुनौतीपूर्ण साइट का चयन किया जा रहा है। तीखे ढलान वाले क्षेत्रों में निर्माण की चुनौतियों से निपटने में कारगर भवन निर्माण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह एक ‘मॉडल कंस्ट्रक्शन’ होगा। ताकि इसी आधार पर भविष्य में अन्य लोगों को भवन निर्माण के प्रति जागरूक किया जा सके। बताया कि पहले फेज में 100 से 150 भवन बनाए जाएंगे।
हेलीपेड भी होगा, हवाई राहत कार्यों में मिलेगी मदद
वैज्ञानिक डा. अजय चौरसिया ने बताया कि कॉलोनी में आवासीय भवन, आफिस, गेस्ट हाउस समेत सभी जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां तक की हेलीपैड का भी निर्माण होगा। इससे हवाई संबंधी राहत कार्यों में भी मदद मिल सकेगी।




