बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। इस बार पार्टी “नंबर गेम” में नहीं फंसना चाहती, बल्कि उन सीटों पर चुनाव लड़ेगी जहां उसकी जीत की संभावना अधिक होगी। कांग्रेस ने आरजेडी के साथ गठबंधन जारी रखने का ऐलान किया है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
नंबर गेम से दूर रहेगी कांग्रेस
2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 19 सीटें जीतने में सफल रही। उस समय आरजेडी ने कांग्रेस को कई कठिन सीटें दी थीं, जहां बीजेपी और जेडीयू का मजबूत पकड़ था। इस बार कांग्रेस ऐसी गलती दोहराने के मूड में नहीं है। पार्टी के रणनीतिकारों ने तय किया है कि वे केवल उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ेंगे जहां जीत की संभावना अधिक होगी।
एम-वाई समीकरण वाली सीटों पर नजर
कांग्रेस ने इस बार मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण वाली सीटों को प्राथमिकता देने की योजना बनाई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को उन्हीं सीटों पर जीत मिली थी, जहां यादव और मुस्लिम वोटर प्रभावशाली थे। इसके अलावा, पार्टी दलित वोट बैंक पर भी फोकस कर रही है। कांग्रेस की रणनीति है कि वह आरजेडी से उन्हीं सीटों की मांग करेगी जहां यादव, मुस्लिम और दलित वोटर बड़ी संख्या में हैं।
आरजेडी के साथ सम्मानजनक सीटों की सौदेबाजी
आरजेडी ने संकेत दिया है कि इस बार कांग्रेस को 40 से 50 सीटें ही दी जा सकती हैं, जबकि 2020 में उसे 70 सीटें दी गई थीं। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि इस बार सीटों का बंटवारा जीत की संभावनाओं के आधार पर हो, न कि सिर्फ संख्या के आधार पर। पार्टी इस बार आरजेडी की शर्तों पर सीटें लेने के बजाय अपनी पसंद की सीटें चुनेगी। कांग्रेस की रणनीति है कि अगर उसे अपनी पसंद की सीटें मिलती हैं तो वह सीटों की संख्या पर समझौता करने के लिए भी तैयार रहेगी।
2020 की गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ेगी कांग्रेस
2020 में कांग्रेस को जो 70 सीटें मिली थीं, उनमें से 45 सीटें एनडीए के मजबूत गढ़ में थीं, जहां कांग्रेस का जीतना मुश्किल था। आरजेडी ने खुद उन सीटों पर चुनाव लड़ा था जहां उसका एम-वाई समीकरण मजबूत था। इस बार कांग्रेस ने तय किया है कि वह ऐसी सीटों पर चुनाव लड़ेगी जहां उसकी स्थिति मजबूत हो।
दिल्ली मॉडल पर बिहार में चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
कांग्रेस ने दिल्ली में अपने खोए हुए जनाधार को वापस लाने के लिए जो रणनीति अपनाई थी, वही फॉर्मूला बिहार में लागू किया जाएगा। कांग्रेस का फोकस दलित, मुस्लिम और यादव बहुल सीटों पर होगा। पार्टी इन समुदायों के प्रभाव वाली सीटों को आरजेडी से लेने की पूरी कोशिश करेगी।
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी और सीट बंटवारे पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति साफ है – नंबर के फेर में नहीं फंसना, बल्कि जीत की गारंटी वाली सीटों पर फोकस करना।




