नई दिल्ली, आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना चौथा बजट पेश करने जा रही हैं। उनके द्वारा दिया गया दूसरा वाला इतना लंबा था कि कुछ सांसद तो उस दौरान बीच-बीच में झपकी लेते नजर आए थे। सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड सीतारमण के ही नाम है।
उन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करने के दौरान दो घंटे 42 मिनट लंबा भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने जुलाई 2019 में बनाए गए अपने ही दो घंटे और 17 मिनट लंबे भाषण के रिकॉर्ड को तोड़ दिया था।
– क्रिप्टोकरेंसी टैक्सेशन पर तस्वीर साफ हो।
– “वर्क फ्रॉम होम” वाले कर्मचारियों के लिए टैक्स रियायतें।
– धारा 80सी की सीमा में इजाफा।
– वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी।
– धारा 80D या धारा 80DDB के तहत COVID-19 इलाज पर टैक्स राहत।
– जीएसटी के तहत ई-चालान ऐप्लिकिबिलिटी (प्रयोज्यता) में कमी
चूंकि, यह केंद्रीय बजट ऐसे वक्त पर आ रहा है, जब उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच सूबों में कुछ ही वक्त बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चर्चा है कि क्या इसमें चुनावी राज्यों की झलक दिखेगी और क्या उन्हें भी इस लिहाज से कुछ राहत मिलेगी राहत?
कहा जा रहा है कि आधारभूत ढांचा क्षेत्र में सड़क, रेलवे और जल के लिए अधिक आवंटन हो सकता है। छोटे व्यवसायों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उपाय भी बजट का हिस्सा हो सकते हैं। उम्मीदें हैं कि आयकर में छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाई जा सकती है।
कोरोना महामारी के प्रकोप और उसकी रोकथाम के लिए लागू की गई देशव्यापी पूर्णबंदी के कारण वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 6.6 फीसद की गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा मई, 2021 में जारी अस्थाई अनुमानों से कहीं बेहतर है। उस समय कहा गया था कि 2020-21 के दौरान महामारी और सख्त पूर्णबंदी के कारण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.3 फीसद का संकुचन आया था।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने सोमवार को संशोधित राष्ट्रीय खाता आंकड़े जारी करते हुए जीडीपी वृद्धि दर को संशोधित किया। इसके मुताबिक, ‘वर्ष 2020-21 और 2019-20 के लिए वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमतों (2011-12) पर जीडीपी का आकार क्रमश: 135.58 लाख करोड़ रुपए और 145.16 लाख करोड़ रुपए रहा। यह वर्ष 2020-21 के दौरान 6.6 फीसद की गिरावट को दर्शाता है, जबकि 2019-20 में यह 3.7 फीसद बढ़ा था।’
बजट 2022 से पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के उन्मूलन से चक्र निवेश को रफ्तार मिलेगी। साथ ही रोजगार के अवसर पैदा होंगे। टीकाकरण अभियान से इस दिशा में सफलता मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने दिन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए इकनॉमिक सर्वे पर कहा कि सरकार ने निम्न आय वर्ग को समर्थन देने के लिए कई कदम उठाए हैं। जाहिर है कि विश्वास बहाली में वक्त लगेगा, क्योंकि उपभोक्ता खर्च में मंदी की वजह सिर्फ आय में कमी नहीं है, बल्कि महामारी और स्वास्थ्य संबंधी अनिश्चितता के कारण भी ऐसा हो रहा है।
वह आगे बोले, ‘एक बार जब महामारी के बादल छंट जाएंगे, तो आय में बढ़ोतरी और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।’




