15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव से पहले एक बार फिर देश की सबसे अमीर नगर निकाय का बजट सुर्खियों में है। वजह साफ है—मुंबई जैसे एक शहर का नगर निगम, देश के कई राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश से भी ज्यादा बड़ा बजट संभालता है।
वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए बीएमसी ने ₹74,427 करोड़ का बजट पेश किया है। यह रकम इतनी विशाल है कि यह कम से कम पांच भारतीय राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के कुल सालाना बजट से अधिक है। यही कारण है कि बीएमसी को न केवल भारत, बल्कि एशिया के सबसे संपन्न नगर निगमों में गिना जाता है।
क्यों इतना बड़ा है बीएमसी का बजट?
बीएमसी की आर्थिक मजबूती की सबसे बड़ी वजह है उसका प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम और मजबूत राजस्व मॉडल। देश के अन्य नगर निगमों के मुकाबले बीएमसी की आय के स्रोत कहीं ज्यादा स्थिर और व्यापक हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
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वित्तीय वर्ष 2025–26 में सिर्फ संपत्ति कर से ₹5,200 करोड़ की आमदनी हुई
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बीएमसी की कुल अनुमानित राजस्व आय ₹43,159 करोड़ के आसपास है
यही वजह है कि बीएमसी को देश का सबसे अमीर नगर निगम माना जाता है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बीएमसी का बजट भूटान, मालदीव और फिजी जैसे करीब 50 छोटे देशों की GDP से भी ज्यादा है।
किन राज्यों से बड़ा है बीएमसी का बजट?
गोवा
वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए गोवा का कुल बजट ₹28,162 करोड़ है, जो बीएमसी के बजट का आधा भी नहीं।
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राजस्व खर्च: ₹20,299 करोड़
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पूंजीगत खर्च: ₹7,863 करोड़
त्रिपुरा
त्रिपुरा सरकार ने 2025–26 के लिए ₹32,423 करोड़ का बजट पेश किया है, जो बीएमसी के बजट का लगभग 43 प्रतिशत है।
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शिक्षा: ₹6,166 करोड़
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स्वास्थ्य: ₹1,948 करोड़
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कृषि: ₹1,885 करोड़
मणिपुर
मणिपुर का 2025–26 का बजट ₹35,103 करोड़ है, जो बीएमसी के बजट का लगभग आधा है।
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सोशल सेक्टर: करीब ₹9,520 करोड़
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कैपिटल इन्वेस्टमेंट: ₹2,000 करोड़ से अधिक
अरुणाचल प्रदेश
क्षेत्रफल के लिहाज से बड़े राज्यों में शामिल अरुणाचल प्रदेश का बजट ₹39,842 करोड़ है, जो बीएमसी से करीब ₹35,000 करोड़ कम है।
लद्दाख से 16 गुना ज्यादा बजट
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए 2025–26 में केवल ₹4,692 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि मुंबई नगर निगम का बजट लद्दाख से करीब 16 गुना अधिक है।
बीएमसी चुनाव के लिहाज से क्यों अहम हैं ये आंकड़े?
बीएमसी का इतना विशाल बजट यह साफ दिखाता है कि एक शहर की स्थानीय सरकार, कई राज्यों से ज्यादा आर्थिक ताकत रखती है। यही वजह है कि बीएमसी चुनाव सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका असर शहरी विकास, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और करोड़ों नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीएमसी की सत्ता पर काबिज पार्टी को न केवल आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण मिलता है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी मजबूत बढ़त हासिल होती है। इसी कारण बीएमसी चुनाव को देश के सबसे अहम स्थानीय निकाय चुनावों में गिना जाता है।




