मुंबई की सियासी धड़कनें तेज़ हैं। जिस संस्था का बजट कई राज्यों से टक्कर लेता है और जिसके फैसले सीधे करोड़ों लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं, आज उसी पर सबकी नज़र है। नगर निगम का चुनाव भले ही स्थानीय माना जाता हो, लेकिन मुंबई में इसे सत्ता की सबसे बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जाता है। यह मुकाबला सिर्फ मेयर या पार्षदों की कुर्सी का नहीं है, बल्कि उस ‘मिनी सरकार’ का है, जो शहर की बुनियादी सुविधाओं से लेकर बड़े विकास कार्यों तक की ज़िम्मेदारी संभालती है।
बीएमसी की ताक़त का सबसे बड़ा आधार उसका बजट और प्रशासनिक ढांचा है। देश की सबसे अमीर नगर निगम मानी जाने वाली बीएमसी का बजट कई छोटे राज्यों के बराबर है। इसके पास न केवल विशाल आर्थिक संसाधन हैं, बल्कि एक ऐसा प्रशासनिक तंत्र भी है, जो मुंबई जैसे महानगर को रोज़ाना चलाने की क्षमता रखता है। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसे अहम क्षेत्रों में लिए गए इसके फैसले सीधे शहर की रफ्तार और जीवनशैली को प्रभावित करते हैं।
बीएमसी की स्थापना वर्ष 1865 में हुई थी और तब से यह मुंबई की स्थानीय सरकार की तरह काम करती आ रही है। आज़ादी से पहले और बाद, हर दौर में शहर के विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सेवाओं के विकास में इसकी भूमिका केंद्रीय रही है। इसी ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व के कारण बीएमसी को सिर्फ नगर निगम नहीं, बल्कि मुंबई की ‘मिनी सरकार’ कहा जाता है।
शहर की सड़कों और ट्रैफिक व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी भी बीएमसी के पास है। मुंबई में करीब 2,050 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क है, जिसका निर्माण, रखरखाव और मरम्मत नगर निगम करता है। हर मानसून में गड्ढों की समस्या से निपटना बीएमसी के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए लगभग 700 किलोमीटर सड़कों को सीमेंट कंक्रीट में बदला जा रहा है, जिस पर करीब 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
मुंबई की पानी की आपूर्ति भी पूरी तरह बीएमसी के नियंत्रण में है। शहर की प्यास सात झीलों—तुलसी, विहार, भात्सा, तानसा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा और मोडक सागर—से बुझती है। इन जलस्रोतों का प्रबंधन, पानी की शुद्धिकरण प्रक्रिया और पाइपलाइन नेटवर्क के ज़रिए घर-घर सप्लाई बीएमसी की जिम्मेदारी है। बढ़ती आबादी के साथ जल व्यवस्था को संतुलित रखना इसकी प्रशासनिक क्षमता की बड़ी परीक्षा माना जाता है।
सफ़ाई और कचरा प्रबंधन भी बीएमसी की सबसे अहम जिम्मेदारियों में शामिल है। मुंबई जैसे महानगर से रोज़ाना 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। कचरे का संग्रह, प्रोसेसिंग और लैंडफिल साइट्स का संचालन नगर निगम करता है। इसके साथ ही सड़कों की सफ़ाई, सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव और पूरे शहर का सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम भी बीएमसी के अधीन आता है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी बीएमसी की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। नगर निगम देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक चलाता है, जिसके तहत मेडिकल कॉलेज अस्पताल, सामान्य और विशेष अस्पताल, डिस्पेंसरी और मातृत्व गृह आते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी के स्वास्थ्य प्रबंधन को देशभर में एक मॉडल के रूप में देखा गया। शिक्षा के क्षेत्र में भी बीएमसी 1,100 से अधिक स्कूलों का संचालन करती है, जहां गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को कम खर्च में शिक्षा मिलती है।
बीएमसी शहर के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की ज़िम्मेदारी भी निभाती है। फ्लाईओवर, पुल, सबवे और लिंक रोड का निर्माण नगर निगम के दायरे में आता है। 2024 में शुरू हुई मुंबई कोस्टल रोड परियोजना को ट्रैफिक के लिहाज़ से बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है। इसके अलावा गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड और वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट भी भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं।
परिवहन और सार्वजनिक स्थानों के प्रबंधन में भी बीएमसी की भूमिका अहम है। नगर निगम BEST बस सेवा की मूल संस्था है, जो मुंबई और उपनगरों में रोज़ाना लाखों यात्रियों को सेवा देती है। इसके साथ ही पार्किंग व्यवस्था, ऑफ-स्ट्रीट और ऑन-स्ट्रीट पार्किंग, और 800 से अधिक पार्कों व खुले मैदानों की देखरेख भी बीएमसी के जिम्मे है।
कुल मिलाकर, बीएमसी सिर्फ एक नगर निगम नहीं बल्कि मुंबई की असली ‘मिनी सरकार’ है। शहर की सड़कें हों, पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं, सफ़ाई व्यवस्था या बड़े विकास प्रोजेक्ट—हर अहम फैसला इसी संस्था के हाथ में होता है। यही कारण है कि बीएमसी चुनाव को स्थानीय राजनीति नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा सियासी मुकाबला माना जाता है।




