“वक्फ कानून पर भ्रम की राजनीति का जवाब देगी बीजेपी, घर-घर जाकर बताएगी सच्चाई”

नई दिल्ली। वक्फ संशोधन कानून को लेकर उठ रहे सवालों और मुस्लिम समुदाय में फैलाए जा रहे भ्रम को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) आक्रामक रुख अपनाने जा रही है। पार्टी ने फैसला किया है कि वह देशभर, विशेषकर बिहार में एक बड़ा जनसंपर्क अभियान चलाएगी, जिसके तहत पार्टी नेता और कार्यकर्ता डोर-टू-डोर कैंपेन करेंगे। मकसद है मुस्लिम समाज के बीच जाकर वक्फ कानून से जुड़े भ्रम को दूर करना और इसके फायदे बताना।

इस अभियान के केंद्र में बिहार रहेगा, क्योंकि वक्फ संशोधन कानून के पारित होने के बाद पहला बड़ा चुनाव यहीं होना है। बीजेपी और एनडीए को लगता है कि विपक्ष इस कानून को मुस्लिम विरोधी बताकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस, आरजेडी और ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम इस कानून का विरोध कर रही हैं और इसे चुनावी मुद्दा बनाने में लगी हैं।

बीजेपी ने इस अभियान के लिए चार सदस्यों की विशेष समिति बनाई है, जिसमें पार्टी महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल, दुष्यंत गौतम, अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दिकी और अनिल एंटनी शामिल हैं। दुष्यंत गौतम स्वयं अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रभारी भी हैं और उन्होंने कहा है कि यह लड़ाई अब केवल कानून की नहीं, बल्कि परसेप्शन की हो गई है। इसलिए पार्टी पूरे तथ्यों और तैयारी के साथ मैदान में उतरेगी।

इस अभियान की शुरुआत एक राष्ट्रीय कार्यशाला से होगी, जिसमें बीजेपी के सांसदों, मंत्रियों और प्रमुख नेताओं को वक्फ कानून की बारीकियों की जानकारी दी जाएगी। इस कार्यशाला में यह भी बताया जाएगा कि संशोधन से पहले कैसे अल्पसंख्यक समाज के साथ नाइंसाफी होती रही। ट्रेनिंग के बाद ये नेता राज्यों में जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे, ताकि वे समाज के बीच जाकर सही जानकारी दे सकें।

बीजेपी का मानना है कि इस कानून के खिलाफ फैलाया जा रहा भ्रम विपक्ष का एक राजनीतिक एजेंडा है, जिससे मुस्लिम समाज को गुमराह किया जा रहा है। खासकर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के बाद से किशनगंज जैसे इलाकों में अफवाहें तेज हुई हैं। बीजेपी ने तय किया है कि वह इन क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर यह स्पष्ट करेगी कि यह कानून किसी के खिलाफ नहीं बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए है।

एनडीए को उम्मीद है कि इस अभियान से मुस्लिम समाज के बीच फैले भ्रम को दूर किया जा सकेगा और यह संदेश जाएगा कि एनडीए उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। बीजेपी का यह भी दावा है कि वक्फ कानून के नाम पर कुछ मुस्लिम संगठन और नेता जनता को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें बेनकाब करने के लिए बीजेपी सीधे उनके गढ़ में जाकर जवाब देगी।

बिहार के मद्देनज़र इस अभियान को और भी गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि जेडीयू के कुछ मुस्लिम नेताओं ने इस कानून के समर्थन के चलते पार्टी से इस्तीफा भी दिया है। ऐसे में बीजेपी और एनडीए का जोर अब यह दिखाने पर है कि वह किसी भी तरह से मुस्लिम विरोधी नहीं हैं, बल्कि हर वर्ग के कल्याण में विश्वास रखते हैं।

इस डोर-टू-डोर कैंपेन के जरिए बीजेपी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वक्फ कानून से जुड़े तथ्यों को जनता तक पहुंचाया जाए और विपक्ष द्वारा रचे जा रहे भ्रमजाल को तोड़ा जाए।

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