BJP की बैठक में मोदी का प्रहार-‘कुछ पार्टियों का इकोसिस्टम देश को भटका रहा, हमें इनके जाल में नहीं फंसना है’

जयपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Prime Minister Narendra Modi) ने जयपुर में चल रही भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक को आज ऑनलाइन संबोधित किया। यह बैठक 19 से 21 मई तक जयपुर में आयोजित की गई है। बैठक में शामिल होने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा(BJP president JP Nadda) गुरुवार को ही जयपुर पहुंच गए थे। बैठक में पार्टी को और मजबूत करने के साथ देश के मौजूदा हालात पर विचार-विमर्श हो रहा है।  बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने किसी पार्टी का नाम लिए कहा-कोई भी दल हो, उसको भी विकासवाद की राजनीति पर आने के लिए मजबूर करना है। हम देख रहे हैं कि आज कुछ पार्टियों का इकोसिस्टम पूरी शक्ति से देश को मुख्य मुद्दों को भटकाने में लगा हुआ है। हमें कभी ऐसी पार्टियों के जाल में नहीं फंसना है। हमें कभी कोई शॉर्ट-कट नहीं लेना है।  हमें देशहित से जुड़े जो भी बुनियादी विषय हैं, जो Core-Issues हैं उन्हीं पर आगे बढ़ना है। और ये Core-Issues क्या हैं? गरीब का कल्याण, गरीब का जीवन आसान बनाने के लिए, गरीब को सशक्त करने के लिए हमें लगातार काम करना है।

मोदी ने जनसंघ के सफर पर कहा
जनसंघ से लेकर हमारी जो यात्रा शुरू हुई और भाजपा के रूप में फली-फूली, पार्टी के इस स्वरूप को, उसके विस्तार को देखते हैं, तो गर्व तो होता ही है, लेकिन इसके निर्माण में खुद को खपाने वाली पार्टी की सभी विभूतियों को मैं आज नमन करता हूं। दुनिया आज भारत को बहुत उम्मीदों से देख रही है। ठीक वैसे ही भारत में भाजपा के प्रति, जनता का एक विशेष स्नेह है। देश की जनता भाजपा को बहुत विश्वास से, बहुत उम्मीद से देख रही है। देश की जनता की ये आशा-आकांक्षा हमारा दायित्व बहुत बढ़ा देती है।

आजादी के अमृत काम
मोदी ने कहा-आजादी के इस अमृत काम में देश अपने लिए अगले 25 वर्षों के लक्ष्य तय कर रहा है। भाजपा के लिए ये समय है, अगले 25 वर्षों के लक्ष्यों को तय करने का, उनके लिए निरंतर काम करने का। हमारा दर्शन है पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद और अंत्योदय। हमारा चिंतन है डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की सांस्कृतिक राष्ट्रनीति। हमारा मंत्र है ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’।

2014 के बाद भाजपा ने सोच बदली
हमारे देश में एक लंबा कालखंड ऐसा रहा जब लोगों की सोच ऐसी हो गई थी कि बस किसी तरह समय निकल जाए। न सरकार से उनको अपेक्षा थी और न ही सरकार उनके प्रति अपनी कोई जवाबदेही समझती थी। 2014 के बाद भाजपा देश को इस सोच से बाहर निकालकर लाई है। मैं देश के उज्ज्वल भविष्य को भली भांति देख रहा हूं। जब मैं आत्मविश्वास से भरे हुए देश के युवाओं को देखता हूं, कुछ कर गुजरने के हौसले के साथ आगे बढ़ती हुई बहन-बेटियों को देखता हूं तो मेरा आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ जाता है।

हमें आराम तो नहीं करना है
आजादी के इस अमृत काल में देश बड़े लक्ष्यों पर काम कर रहा है, तब हमें कुछ बातें और भी याद रखनी जरूरी है। भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते हमें चैन से बैठने का कोई हक नहीं है, कोई अधिकार नहीं है। हमें आराम ही तो नहीं करना है। आज भी हम अधीर हैं, बेचैन हैं, आतुर हैं क्योंकि हमारा मूल लक्ष्य, भारत को उस उंचाई पर पहुंचाना है जिसका सपना देश की आजादी के लिए मर-मिटने वालों ने देखा था। इस महीने केंद्र की भाजपा सरकार के, एनडीए सरकार के 8 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये 8 वर्ष संकल्प के रहे हैं, सिद्धियों के रहे हैं। ये 8 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। ये 8 वर्ष  देश के छोटे किसानों, श्रमिकों, मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं को पूरा करने वाले रहे हैं। ये 8 वर्ष देश के संतुलित विकास, सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा के लिए रहे हैं। ये 8 वर्ष देश की माताओं-बहनों-बेटियों के सशक्तिकरण, उनकी गरिमा बढ़ाने के प्रयासों के नाम रहे हैं। मैं सैचुरेशन की बात करता हूं। सैचुरेशन सिर्फ पूर्णता का आकंड़ा भर नहीं है। ये भेदभाव, भाई-भतीजावाद, तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार के चंगुल से देश को बाहर निकालने का माध्यम है। सरकार पर, सरकार की व्यवस्थाओं पर, सरकार के डिलीवरी मैकेनिज्म पर किसी समय देश का जो भरोसा उठ गया था। 2014 के बाद जनता जनार्दन के आशीर्वाद से भाजपा सरकार उसे वापस लेकर आई है। आज गरीब से गरीब भी अपने आसपास लोगों को योजनाओं का लाभ मिलते देख रहा है। वो आज बहुत विश्वास से कहता है कि एक न एक दिन मुझे भी इस योजना का लाभ अवश्य मिलेगा। जिस एक और विषय पर हमें निरंतर काम करते रहना है वो है देश में विकास वाद की राजनीति की चौतरफा, चारो दिशा में स्थापना होनी चाहिए।

परिवारवाद पर बोले
मैं आज के युवाओं की भाषा में कहूं, तो जो भारत के समृद्ध भविष्य के code लिखने के लिए लालायित हैं, ऐसे हर युवा को हमें भाजपा के साथ जोड़ना है। हमें ये याद रखना है कि परिवारवाद की राजनीति से विश्वासघात खाने वाले देश के युवाओं का विश्वास सिर्फ भाजपा ही लौटा सकती है। आजादी के बाद से ही वंशवाद और परिवार वाद ने देश का कितना भयंकर नुकसान किया है। परिवारवादी पार्टियों ने देश में भ्रष्टाचार को, धांधली को, भाई-भतीजा वाद को, इसी को आधार बनाकर देश का बहुत मूल्यवान समय बर्बाद किया है। ये परिवारवादी पार्टियां आज भी देश को पीछे ले जाने पर तुली हुई हैं। उनका सार्वजनिक जीवन परिवार से शुरू होता है, परिवार के लिए चलता है, परिवार के खातिर ही करता है। भजपा को इन परिवारवादी पार्टियों से निरंतर मुकाबला करना है। परिवारवाद-वंशवाद लोकतंत्र के लिए ये सबसे घातक परंपरा है।

यह है एजेंडा
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने बताया कि 20 मई को चार सत्रों के अलावा जेपी नड्डा का संबोधन होगा। 21 मई को राष्ट्रीय महासचिवों(संगठन) की बैठक आयोजित की जाएगी। यह  बैठक जयपुर के आमेर विधानसभा क्षेत्र स्थित होटल लीला पैलेस कूकस में हो रही है। मीडिया से बातचीत में अरुण सिंह ने बताया कि बैठक में पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूत करने के अलावा देश के अन्य हालात पर भी चर्चा जारी है। बैठक में पार्टी पदाधिकारियों, राष्ट्रीय स्तर के महासचिवों, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष सहित 136 पदाधिकारी शामिल हुए हैं।

क्षेत्रीय पार्टियों पर धीरे-धीरे कुछ लोगों कब्जा
इससे पहले गुरुवार को पंजाब कांग्रेस के नेता रहे सुनील जाखड़ ने नई दिल्ली स्थित भाजपा के मुख्यालय में भाजपा ज्वाइन कर ली। इस मौके पर जेपी नड्डा ने देश की राजनीति पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा-पंजाब में राष्ट्रवादी ताकतों का प्रथम स्थान भाजपा ले रही है। इसलिए आवश्यक होता है कि राष्ट्रवादी विचार रखने वाले सभी लोग भाजपा से जुड़ें और पार्टी को मजबूती प्रदान करें। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दल महत्वपूर्ण उपकरण है। अगर वह स्वस्थ है, तो प्रजातंत्र स्वस्थ है। अगर वो अस्वस्थ है, तो प्रजातंत्र अस्वस्थ है। इसलिए हमें अपनी कार्य प्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों, संगठन की विचार प्रक्रिया को ध्यान में रखना चाहिए।क्षेत्रीय पार्टियों पर धीरे-धीरे कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। अब क्षेत्रीय पार्टियों में विचारधारा किनारे हो गई और परिवार सामने आ गए हैं। इन्हें किसी भी तरह से सत्ता में आना होता है, इसलिए ये ध्रुवीकरण करने में भी पीछे नहीं रहते। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देना, हर क्षेत्रीय भाषा के प्रति हमारे कमिटमेंट को दिखाता है। भाजपा, भारतीय भाषाओं को भारतीयता की आत्मा मानती है और राष्ट्र के बेहतर भविष्य की कड़ी मानती है।

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