बिहार आने-जाने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। एक तरफ 21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक राजेंद्र पुल और दिनकर ग्राम सिमरिया-बरौनी रेलखंड पर चलने वाले मेगा ब्लॉक के कारण 50 से ज्यादा ट्रेनें अलग-अलग तारीखों में रद्द रहेंगी और कई ट्रेनों के रूट बदले जाएंगे। दूसरी तरफ दशहरा, दिवाली और छठ के दौरान बिहार लौटने वाले यात्रियों के लिए अभी से ट्रेनों में लंबी वेटिंग शुरू हो गई है। दिल्ली से पटना आने वाली कुछ ट्रेनों में वेटिंग 400 के पार पहुंच चुकी है, जबकि मुंबई से पटना और दरभंगा की फ्लाइट का किराया 40 हजार रुपये तक पहुंच रहा है।
21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक रेल यात्रा पर असर
राजेंद्र पुल पर नए रेल पुल को मौजूदा नेटवर्क से जोड़ने और दिनकर ग्राम सिमरिया-बरौनी के बीच मुख्य लाइन कनेक्शन को मजबूत करने के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जा रहा है। यह काम 21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान अलग-अलग तारीखों पर 50 से ज्यादा ट्रेनों का परिचालन रद्द रहेगा, जबकि कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को बदले हुए रूट से चलाया जाएगा। कुछ ट्रेनों का आंशिक प्रारंभ या समापन भी किया जाएगा। इसका असर सिर्फ बिहार की लोकल यात्रा पर नहीं पड़ेगा, बल्कि बिहार से होकर दिल्ली, बंगाल, झारखंड और उत्तर भारत के कई हिस्सों को जोड़ने वाली ट्रेनों पर भी देखने को मिलेगा। इसलिए 21 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का ताजा स्टेटस जरूर देखना होगा।
हावड़ा-पटना समेत कई ट्रेनें रहेंगी रद्द
मेगा ब्लॉक के दौरान हावड़ा-पटना सुपरफास्ट स्पेशल, हावड़ा-मोकामा एक्सप्रेस, हावड़ा-रक्सौल एक्सप्रेस, कोलकाता-आरा गरीब रथ, कोलकाता-जयनगर एक्सप्रेस, मिथिलांचल एक्सप्रेस, तिरहुत एक्सप्रेस, गंगा सागर एक्सप्रेस और हावड़ा-दरभंगा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों का परिचालन अलग-अलग तारीखों में प्रभावित रहेगा। इसके अलावा राउरकेला-जयनगर, टाटानगर-जयनगर, टाटानगर-थावे, पुरी-पटना, रांची-गोरखपुर, बिलासपुर-बक्सर और टाटानगर-कटिहार जैसी ट्रेनों पर भी असर पड़ेगा। हालांकि सभी ट्रेनें पूरे 21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक रद्द नहीं रहेंगी। अलग-अलग ट्रेनों के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं।
पूर्वांचल, मौर्य समेत कई ट्रेनों का बदलेगा रूट
रद्द होने वाली ट्रेनों के अलावा कई प्रमुख ट्रेनों को डायवर्टेड रूट से चलाया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक हावड़ा-नई दिल्ली दुरंतो को किउल-गया-ग्रैंड कॉर्ड के रास्ते चलाया जाएगा। पूर्वा एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस, गुरुमुखी सुपरफास्ट और विभूति एक्सप्रेस समेत कुछ ट्रेनों को झाझा-किउल-शेखपुरा-बिहारशरीफ-बख्तियारपुर मार्ग से चलाने की व्यवस्था की गई है। मौर्य एक्सप्रेस, हैदराबाद-रक्सौल एक्सप्रेस और चेर्लापल्ली-दरभंगा एक्सप्रेस के रूट में भी बदलाव किया गया है। कुछ ट्रेनों का आंशिक संचालन दूसरे स्टेशनों से किया जाएगा। जसीडीह-मोकामा मेमू को भी निर्धारित अवधि में किउल तक चलाने का फैसला किया गया है।
दिवाली-छठ में बिहार लौटने वालों की दूसरी बड़ी परेशानी
रेल ब्लॉक की परेशानी खत्म होने के बाद भी बिहार आने वाले यात्रियों के सामने राहत की स्थिति नहीं दिख रही है। दशहरा, दिवाली और छठ के दौरान बिहार लौटने वाले प्रवासियों के लिए ट्रेनों में अभी से सीटों की मांग तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद से पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बिहार के दूसरे शहरों तक आने वाली ट्रेनों में कई तारीखों पर लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है। दिल्ली से पटना आने वाली नई दिल्ली-राजेंद्रनगर तेजस में 10 नवंबर को थर्ड एसी की वेटिंग 410 तक पहुंच गई थी। 11 नवंबर को यह 427 और 12 नवंबर को 463 तक पहुंच गई। इसी तरह नई दिल्ली-राजेंद्र नगर संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में भी 10 नवंबर के लिए फर्स्ट एसी में 21, सेकेंड एसी में 52, थर्ड एसी में 159 और स्लीपर में 134 तक वेटिंग बताई गई है।
मुंबई से बिहार आने की फ्लाइट भी 40 हजार के पार
ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं मिलने के बाद जिन यात्रियों के पास फ्लाइट का विकल्प है, उनके लिए भी सफर सस्ता नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली से पटना की फ्लाइट का किराया 26 हजार रुपये से अधिक और दिल्ली से दरभंगा का किराया 17 हजार रुपये से अधिक तक पहुंच गया है। मुंबई से पटना के लिए करीब 35 हजार रुपये और मुंबई से दरभंगा के लिए करीब 40.5 हजार रुपये प्रति व्यक्ति तक का किराया बताया गया है। यानी त्योहारों में घर लौटने वाले यात्रियों को ट्रेन में सीट के संकट के साथ-साथ हवाई सफर के महंगे किराये का भी सामना करना पड़ सकता है।
ट्रेन और फ्लाइट के अलावा बिहार आने वाली लंबी दूरी की बसों में भी त्योहारों से पहले एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। दिल्ली, पंजाब, रांची, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश समेत कई जगहों से बिहार आने वाली बसों में सीटों की मांग बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक बस ऑपरेटरों ने भी त्योहारों के दौरान किराये में बढ़ोतरी की है। ऐसे में बिहार आने वाले यात्रियों के सामने इस बार परिवहन के तीनों प्रमुख विकल्पों—ट्रेन, फ्लाइट और बस—में बढ़ती मांग और बढ़ते खर्च की चुनौती है।
10 से 17 नवंबर के बीच सबसे ज्यादा दबाव
दिवाली और छठ के आसपास बिहार आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 10 से 17 नवंबर के बीच ट्रेनों में यात्रा का दबाव अधिक है। दिवाली के आसपास बड़ी संख्या में प्रवासी बिहार लौटेंगे, जबकि छठ के बाद नौकरी-पेशा लोगों की वापसी शुरू होगी। यानी बिहार आने वाले यात्रियों के लिए चुनौती दो चरणों में सामने आ रही है। सितंबर-अक्टूबर में रेल ब्लॉक के कारण कई ट्रेनें रद्द और डायवर्ट रहेंगी, जबकि नवंबर में दिवाली-छठ की भीड़ के कारण कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में यात्रा की तारीख तय करने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन का स्टेटस, रूट और टिकट उपलब्धता पहले से जांचना जरूरी होगा। रेलवे ने भी यात्रियों से यात्रा से पहले आधिकारिक पूछताछ व्यवस्था या 139 के जरिए ट्रेन की स्थिति जांचने की सलाह दी है।




