Bihar Budget 2026-27: गरीबों को सस्ता आवास, बंद चीनी मिलें चालू होंगी, जानिए बिहार बजट में क्या-क्या है?

बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना बजट पेश कर दिया है। बजट सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट रखा। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक है और वर्ष 2005 के बजट से लगभग 11 गुना बड़ा बताया जा रहा है। इस बजट में सरकार का फोकस साफ तौर पर गरीबों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और स्किल डेवलपमेंट पर नजर आता है।

बजट का कुल आकार और सरकार का लक्ष्य

वित्त मंत्री के मुताबिक सरकार का उद्देश्य बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है। बजट भाषण में कहा गया कि बीते वर्षों में राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है और अब सरकार विकास योजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

गरीब परिवारों के लिए क्या है खास?

इस बजट में जाति आधारित गणना में चिन्हित 94 लाख गरीब परिवारों को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी इलाकों में हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे, ताकि छोटे व्यापारियों और कारीगरों को सीधा बाजार मिल सके। गरीब परिवारों को सस्ता आवास उपलब्ध कराने की योजनाओं को भी गति देने की बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य यह है कि इन परिवारों को सिर्फ सरकारी सहायता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें रोजगार और आय के स्थायी साधन भी उपलब्ध कराए जाएं।

किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए योजनाएं

किसानों की आय बढ़ाने के लिए बजट में चौथे कृषि रोडमैप (2023-28) को आगे बढ़ाने का ऐलान किया गया है। सरकार का फोकस खेती को आधुनिक बनाने, कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन करने और किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने पर रहेगा, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सके।

उद्योगों को लेकर बड़ा दावा

बिहार बजट में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 50 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत डेयरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और मखाना उद्योग को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने की योजना है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों के विकास से ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

बंद चीनी मिलों पर सरकार की नजर

बजट में ‘समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’ योजना के तहत राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह कदम उन जिलों के लिए खास तौर पर अहम माना जा रहा है, जहां चीनी मिलें बंद होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर बुरा असर पड़ा था।

शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च

इस बजट में सबसे अधिक राशि शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए रखी गई है। शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए कुल 68,216.95 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने हर प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना का भी ऐलान किया है। इसके अलावा हर पंचायत में मॉडल स्कूल स्थापित करने की बात भी बजट में शामिल है।

स्वास्थ्य सेक्टर में क्या मिलेगा?

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बजट में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। राज्य के 10 नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही बुजुर्गों के लिए घर बैठे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और संपत्ति पंजीकरण जैसी सुविधाएं घर से ही देने की योजना भी शामिल की गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट में 21,270.40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्लान

रोजगार और कौशल विकास को लेकर बजट में बड़ा ऐलान किया गया है। हब और स्पोक मॉडल के तहत राज्य की हर कमिश्नरी में मेगा स्किल सेंटर बनाए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग मिलेगी और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

ग्रामीण विकास, खेल और पर्यटन

ग्रामीण विकास के लिए बजट में 23,701.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही खेल और पर्यटन के क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार राज्य में पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कह रही है।

अगर एक पंक्ति में समझा जाए, तो बिहार बजट 2026-27 गरीबों के सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश, रोजगार सृजन और उद्योगों को दोबारा खड़ा करने पर केंद्रित नजर आता है। हालांकि, इन सभी घोषणाओं का असली असर जमीन पर क्रियान्वयन से ही तय होगा। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह बजट बिहार की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी में कितना बदलाव ला पाता है।

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