गणतंत्र दिवस पर ताजमहल में फहराया गया तिरंगा, अखिल भारत हिंदू महासभा ने ली जिम्मेदारी

गणतंत्र दिवस पर ताजमहल में फहराया गया तिरंगा, अखिल भारत हिंदू महासभा ने ली जिम्मेदारी

आगरा में 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर ताजमहल परिसर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराए जाने और राष्ट्रगान गाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

जानकारी के अनुसार, ताजमहल के निर्माण की शुरुआत वर्ष 1632 में हुई थी और संगठन का दावा है कि साल 2026 में यह पहला अवसर है, जब गणतंत्र दिवस के दिन ताजमहल परिसर में तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रगान गाया गया। वायरल वीडियो में कुछ लोग ताजमहल परिसर के भीतर राष्ट्रीय ध्वज फहराते और राष्ट्रगान गाते नजर आ रहे हैं।

अखिल भारत हिंदू महासभा ने किया दावा

इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी अखिल भारत हिंदू महासभा ने ली है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ताजमहल में तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने का कार्यक्रम उन्हीं की ओर से किया गया।
महासभा के शहर महामंत्री नंदू कुमार और मंडल महामंत्री नितेश भारद्वाज द्वारा यह कार्य किए जाने का दावा किया गया है।

सीएम योगी के आह्वान का हवाला

अखिल भारत हिंदू महासभा का कहना है कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस आह्वान से प्रेरित था, जिसमें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मदरसों और मस्जिदों सहित विभिन्न संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की बात कही गई थी। संगठन का दावा है कि उसी भावना के अनुरूप ताजमहल परिसर में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

संगठन ने सार्वजनिक रूप से ली जिम्मेदारी

वीडियो सामने आने के बाद संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की है। अखिल भारत हिंदू महासभा के शहर अध्यक्ष विशाल कुमार, जिला अध्यक्ष मीरा राठौर और मंडल अध्यक्ष मनीष पंडित ने कहा कि यह पूरा कार्यक्रम संगठन की अपनी पहल पर किया गया। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य केवल राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना और गणतंत्र दिवस को सम्मानपूर्वक मनाना था।

प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

फिलहाल ताजमहल जैसे विश्व प्रसिद्ध स्मारक में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने और राष्ट्रगान गाए जाने के इस मामले पर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक प्रशासन या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

ताजमहल परिसर में हुए इस आयोजन ने एक ओर जहां राष्ट्रभक्ति को लेकर बहस छेड़ दी है, वहीं दूसरी ओर इसके कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम और आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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