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नई दिल्ली, 21जनवरी 2021

फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से सपा नेता आजम खान और उनकी पत्नी एवं बेटे को राहत बरकरार मिली. जमानत रद्द करने की यूपी सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमानत देने के फैसले को यूपी सरकार ने चुनौती दी. दरअसल, अक्टूबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में जेल में बंद आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान की जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी. इन्‍हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने मोहम्मद आजम खान की भी जमानत अर्जी मंजूर कर ली, लेकिन इन्‍हें शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना का बयान दर्ज होने के बाद रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अलीगढ़ कोर्ट खुलने पर तीन माह के भीतर शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने की अपेक्षा की है. यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने डा तंजीन फातिमा ,मोहम्मद आजम खान व मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां की जमानत अर्जियों को निस्तारित करते हुए दिया है.

याचिकायों के खिलाफ बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने रामपुर के गंज थाने में धोखाधड़ी, कूटकरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करायी है, जिसमें पुलिस चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. मुकदमा चल रहा है. आजम खान व तंजीन फातिमा पर आरोप है कि अपने बेटे की दो जन्मतिथि प्रमाणपत्र बनवाया है. एक नगर पालिका परिषद रामपुर व दूसरी नगर निगम लखनऊ से बनवाया है. दोनों जन्म तिथि में काफी अंतर है.

अब्दुल्ला आजम खान पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का फायदा उठाकर विधान सभा चुनाव लड़ने का आरोप है. हाईकोर्ट ने इनका चुनाव निरस्त कर दिया है. अब्दुल्ला आजम खान का कहना था कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने मे उनकी कोई भूमिका नहीं है. इसलिए जमानत पर रिहा किया जाए. तंजीन फातिमा का कहना था कि महिला होने के कारण जमानत दी जाए. इसलिए दोनों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया. परन्तु आजम खान को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने के बाद रिहा करने का आदेश दिया गया है.