नई दिल्ली: शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने हाल ही में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आदित्य ठाकरे ने बताया कि यह मुलाकात खासतौर पर इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) के भीतर जारी फूट को भरने के लिए है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ईवीएम और वोटर फ्रॉड के मुद्दे गंभीर हो चुके हैं, और अब सभी पार्टियों को एकजुट होकर देश के भविष्य की दिशा तय करनी होगी।
आदित्य ठाकरे ने इससे पहले राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी और इस दौरान उन्होंने देश में लोकतंत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। उनकी इस मुलाकात की महत्ता इस लिहाज से भी है क्योंकि वह एक तरफ तो कांग्रेस और अब आम आदमी पार्टी दोनों ही दलों से संवाद स्थापित कर रहे हैं, जो गठबंधन के भीतर एकजुटता की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
आदित्य ठाकरे ने दिल्ली चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा था कि चुनाव जीतने के बाद बीजेपी को जनता का नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का धन्यवाद करना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में धांधली के आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि इन मुद्दों पर चर्चा की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में अनियमितताओं को नजरअंदाज किया और नए मतदाताओं के आंकड़ों पर सवाल उठाए।
आदित्य ठाकरे का यह कदम इंडिया गठबंधन के अंदर नई दिशा की ओर इशारा कर रहा है, क्योंकि गठबंधन में पिछले कुछ समय से आंतरिक मतभेदों की खबरें आई थीं, खासकर दिल्ली चुनाव के बाद। अब ठाकरे की मुलाकात के जरिए गठबंधन में एकता और संवाद की संभावना बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
इससे पहले, आदित्य ठाकरे ने राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान भी चुनावी धांधली और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चिंता व्यक्त की थी। अब जब वे केजरीवाल से भी मुलाकात कर रहे हैं, तो यह संकेत मिल रहे हैं कि वे आगे आने वाले चुनावों के लिए एक मजबूत और समन्वित रणनीति तैयार करने पर विचार कर रहे हैं।




