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नई दिल्ली, 24 जून 2021

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को टॉयकेथॉन-2021 के प्रतिभागियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में देश के युवा हैकथॉन के मंच के माध्यम से देश की प्रमुख चुनौतियों से जुड़े हैं। इसके पीछे सोच देश की क्षमताओं को संगठित करना और उन्हें एक माध्यम देना है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा ” साहसे खलु श्री वसति। यानि साहस में ही श्री रहती है, समृद्धि रहती है। इस चुनौतीपूर्ण समय में देश के पहले टॉय-केथॉन का आयोजन इसी भावना को मजबूत करता है। इस ‘टॉय-केथॉन’ में हमारे बाल मित्रों से लेकर, युवा साथियों, टीचर्स, स्टार्ट अप्स और उद्यमियों ने भी बहुत उत्साह से हिस्सा लिया है। पहली बार ही डेढ़ हजार से ज्यादा टीमों का ग्रैंड फिनाले में शामिल होना, ये अपने आप में उज्जवल भविष्य के संकेत देता है। ये टॉय और गेम्स के मामले में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देता है। इसमें कुछ साथियों के बहुत अच्छे आइडियाज भी उभर कर के आगे आए हैं। अभी कुछ साथियों के साथ मुझे बातचीत करने का अवसर भी मिला। मैं इसके लिए फिर से एक बार बधाई देता हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा, ” आज हम अपनी आवश्यकता के भी लगभग 80 प्रतिशत खिलौने विदेशों से आयात करते हैं। यानि इन पर देश का करोड़ों रुपए बाहर जा रहा है। इस स्थिति को बदलना बहुत जरूरी है। और ये सिर्फ आंकड़ों की ही बात नहीं है, बल्कि ये सेक्टर देश के उस वर्ग तक, उस हिस्से तक विकास पहुंचाने में सामथ्र्य रखता है, जहां इसकी अभी सबसे ज्यादा जरूरत है। खेल से जुड़ा जो हमारा कुटीर उद्योग है, जो हमारी कला है, जो हमारे कारीगर हैं, वो गांव, गरीब, दलित, आदिवासी समाज में बड़ी संख्या में हैं। हमारे ये साथी बहुत सीमित संसाधनों में हमारी परंपरा, हमारी संस्कृति को अपनी बेहतरीन कला से निखारकर अपने खिलौनों में ढालते रहे हैं।”

पीएम ने कहा कि इसमें भी विशेष रूप से हमारी बहनें, हमारी बेटियां बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं। खिलौनों से जुड़े सेक्टर के विकास से, ऐसी महिलाओं के साथ ही देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले हमारे आदिवासी और गरीब साथियों को भी बहुत लाभ होगा। लेकिन ये तभी संभव है जब, हम अपने लोकल खिलौनों के लिए वोकल होंगे, लोकल के लिए वोकल होना जरूरी है और उनको बेहतर बनाने के लिए, ग्लोबल मार्केट में कंपिटेंट बनाने के लिए हर स्तर पर प्रोत्साहन देंगे।

पीएम ने कहा कि इसके लिए इनोवेशन से लेकर फाइनेंसिंग तक नए मॉडल विकसित करना बहुत जरूरी है। सस्ता डेटा और इंटरनेट में आई तेजी, आज गांव- गांव तक देश को डिजिटली कनेक्ट कर रही है। ऐसे में फिजिकल खेल और खिलौनों के साथ-साथ वर्चुअल, डिजिटल, ऑनलाइन गेमिंग में भी भारत की संभावनाएं और सामथ्र्य, दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन जितने भी ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स आज मार्केट में उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकतर का कॉन्सेप्ट भारतीय नहीं है, हमारी सोच से मेल नहीं खाता है। इसलिए हमारा दायित्व है कि ऐसे वैकल्पिक कॉन्सेप्ट डिजायन हों, जिसमें भारत का मूल चिंतन, जो सम्पूर्ण मानव कल्याण से जुड़ा हुआ हो।

पीएम मोदी ने कहा, कोशिश ये है कि देश की चुनौतियों और समाधान से हमारे नौजवान का सीधा कनेक्ट हो। जब ये कनेक्ट मजबूत होता है तो हमारी युवा शक्ति की प्रतिभा भी सामने आती है और देश को बेहतर समाधान भी मिलते हैं। देश के पहले ‘टॉय-केथॉन’ का मकसद भी यही है। मुझे याद है, मैंने खिलौनों और डिजिटल गेमिंग की दुनिया में आत्मनिर्भरता और लोकल सोल्यूशंस के लिए युवा साथियों से अपील की थी। उसका एक पॉजिटिव रिस्पॉन्स देश में देखने को मिल रहा है। हालांकि चंद लोगों को ये भी लगता है कि खिलौने ही तो हैं, इनको लेकर इतनी गंभीर चर्चा की जरूरत क्यों है। असल में ये टॉय ये गेम्स, हमारी मानसिक शक्ति, हमारी क्रिएटिविटी और हमारी अर्थव्यवस्था पर, ऐसे अनेक पहलुओं को प्रभावित करते हैं।”