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नई दिल्ली, 14 जून 2021

केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसकी प्रमुख वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) योजना खाद्य सुरक्षा को पोर्टेबल बनाती है और इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के लाभार्थियों को पोर्टेबिलिटी के माध्यम से देश में किसी भी ईपीओएस सक्षम उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) तक पहुंचने में सक्षम बनाना है। केंद्र ने प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं और दुखों से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले में अपने लिखित हलफनामे में कहा, ओएनओआरसी योजना का उद्देश्य सभी एनएफएसए प्रवासी लाभार्थियों को बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ अपने समान/मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग करके देश में कहीं भी अपनी पसंद के किसी भी फेयर प्राइस शॉप (एफपीएस) से अपने पीडीएस/एनएफएसए खाद्यान्न तक पहुंचने के लिए सशक्त बनाना है। संक्षेप में कहा जाए तो ओएनओआरसी खाद्य सुरक्षा को पोर्टेबल बनाता है।

केंद्र ने प्रस्तुत किया कि, देश में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के तहत चल रहे प्रौद्योगिकी संचालित सुधारों के हिस्से के रूप में, उसने एनएफएसए के तहत राशन काडरें की राष्ट्रव्यापी पोर्टेबिलिटी के लिए ओएनओआरसी योजना पेश की थी। केंद्र ने कहा, यह प्रस्तुत किया जाता है कि पोर्टेबिलिटी वह विकल्प देती है, साथ ही साथ परिवार को शेष पात्र राशन लेने में सक्षम बनाती है।

केंद्र ने दावा किया कि उसने उन सभी लाभार्थियों के लिए खाद्यान्न की योजना का विस्तार किया है, जो एनएफएसए के तहत कवर नहीं हैं और जिन्हें राज्य सरकारों द्वारा अपनी योजना के तहत 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह के लिए राशन कार्ड जारी किए गए हैं।

केंद्र ने प्रस्तुत किया कि महामारी के दौरान अतिरिक्त खाद्य सुरक्षा उपाय प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई-3) के तीसरे चरण के तहत उपलब्ध कराए गए हैं, जिसके माध्यम से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में केंद्रीय पूल से सभी एएवाई और पीएचएच लाभार्थियों को दो महीने यानी मई और जून 2021 के लिए 5 किलो/व्यक्ति/माह लागत पर खाद्यान्न का आवंटन किया जा रहा है।

केंद्र ने प्रस्तुत किया कि यह योजना 80 करोड़ लाभार्थियों को कवर करती है और एनएफएसए, 2013 के अनुसार उनके सामान्य टीपीडीएस आवंटन के अलावा सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध है। नवंबर, 2021 तक इसके पांच महीने के विस्तार की भी घोषणा की गई है।

केंद्र ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत सरकार वर्तमान संकट के दौरान खाद्य सुरक्षा की कठिनाई से निपटने के लिए उपरोक्त योजनाओं के तहत राज्यों को अत्यधिक रियायती कीमतों पर पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि पहचान और वितरण की जिम्मेदारी लाभार्थी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की है।

केंद्र और राज्य सरकारों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।