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हरिद्वार, 20 अप्रैल 2021

कोरोना वायरस महामारी का ग्राफ प्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश में तेज से बढ़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण का असर अब महाकुंभ 2021 में भी दिखाई देने लगा है। जानकारी के मुताबिक, कुंभ मेले में आए अब संतों के संक्रमित होने की संख्या 78 से ऊपर पहुंच गई है। तो वहीं, एक महामंडलेश्वर की मौत हो गई है, जिसके चलते संत समाज भी सहमा हुआ है। इस बीच महाकुंभ से प्रमुख अखाड़ों के संतों ने वापस जाना शुरू कर दिया है, जिसके बाद भीड़ में अचानक भारी कमी आई है।

कोविड संक्रमण के बढ़ते ग्राफ के कारण कुंभ मेले से रौनक गायब होने लगी है, होटल, धर्मशाला और बाजारों में सन्नाटा पसर गया है। व्यापारी वर्ग पिछले साल के लॉकडाउन और फिर स्नानों पर प्रतिबंध की मार से नहीं उबर पाया था। वहीं, अब कोरोना मरीज बढ़ने से श्रद्धालुओं का आना बंद हो गया है। होटलों में यात्री ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। तो वहीं, शनिवार 17 अप्रैल को जूना अखाड़े ने हरिद्वार कुंभ की समाप्ति की घोषणा कर दी है। जिसके बाद सोमवार को कई स्थानों पर भीड़ नहीं दिखी। आधिकारिक रूप से 30 अप्रैल को समाप्त होने वाले हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान यह अकल्पनीय नजारा है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी ये अपील

दरअसल, हरिद्वार कुंभ मेले में कोरोना के बढ़ते संकट को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि इस कोरोना काल में अब कुंभ मेला को प्रतीकात्मक ही रखा जाना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार (17 अप्रैल) की सुबह ट्वीट कर कहा, ‘आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि से मैंने आज बात की है। सभी संतों के स्वास्थ्य का हाल मैंने जाना है। सभी संतगण प्रशासन को हर तरह का सहयोग भी दे रहे हैं। मैंने इसके लिए संत समाज का आभार जताया है। मैंने संतों से अनुरोध किया है कि दो शाही स्नान हो चुके हैं इसलिए कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए, कुंभ मेले को अब प्रतीकात्मक ही रखा जाए। इससे इस संकट से लड़ाई को एक ताकत मिलेगी।’

जूना अखाड़ा ने किया विधिवत समापन

जिसके कुछ घंटों बाद आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘भारत की जनता और उसकी जीवन रक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए हमने विधिवत कुंभ के आवाहित सभी देवताओं को विसर्जन कर दिया है। जूना अखाड़ा की ओर से यह कुंभ का विधिवत विसर्जन-समापन है।’ हालांकि, इससे पहले जूना अखाड़े के प्रमुख ने कोविड-19 मामलों में वृद्धि के मद्देनजर लोगों से अपील की थी कि हरिद्वार कुंभ में वे सीमित संख्या में आएं।

खाली हो गए छावनियां

शनिवार को कुंभ विसर्जन के ऐलान के बाद रविवार सुबह से छावनियां खाली होनी शुरू हो गईं। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि श्रद्धालुओं और संतों की जान की रक्षा करना पहला धर्म है। श्री पंच अग्नि अखाड़े के सचिव श्रीमहंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि जूना के साथ उनके अखाड़े के संतों की छावनियां भी खाली हो गई हैं। कल्पवास पर आए संत छावनियां छोड़कर अपने-अपने प्रदेशों और शहरों में रवाना हो गए।