TMC Name-Symbol Freeze: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा संगठनात्मक विवाद अब चुनाव आयोग के सामने पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में ‘All India Trinamool Congress’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘Flowers & Grass’ यानी ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसका सीधा असर आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव पर पड़ेगा। दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट अब इन उपचुनावों में TMC के आधिकारिक नाम और पुराने चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
TMC में विवाद की शुरुआत कैसे हुई और दोनों गुटों के दावे क्या हैं?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर विवाद केवल चुनाव चिन्ह तक सीमित नहीं है। मूल विवाद पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, नेशनल वर्किंग कमेटी की वैधता और पार्टी का वास्तविक नेतृत्व किसके पास है, इसे लेकर है। एक तरफ ममता बनर्जी का गुट है, जबकि दूसरी तरफ बागी गुट है। चुनाव आयोग के हालिया आदेश में प्रतिद्वंद्वी गुट का नेतृत्व अरूप रॉय से जोड़ा गया है, जबकि कई मीडिया रिपोर्टों में इस खेमे को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट बताया गया है। इसलिए इस विवाद में दोनों नामों का इस्तेमाल रिपोर्टिंग में दिखाई दे रहा है। विवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी पार्टी की नेशनल वर्किंग कमेटी को लेकर है। ऋतब्रत खेमे का दावा है कि मौजूदा नेशनल वर्किंग कमेटी का कार्यकाल 11 फरवरी 2025 को समाप्त हो गया था और इसके बाद उसके जरिए लिए गए कुछ संगठनात्मक फैसलों की वैधता पर सवाल उठता है। इस खेमे ने जून 2026 में संगठन को नए तरीके से गठित किए जाने का दावा भी किया। दूसरी ओर, ममता गुट का कहना है कि पार्टी की नेशनल वर्किंग कमेटी का कार्यकाल पांच साल का है और वह 2027 तक जारी है। यानी दोनों पक्ष एक ही संगठनात्मक ढांचे की वैधता को अलग-अलग तरीके से देखते हैं। इसी विवाद के बीच दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने पहुंचे और खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बताते हुए अपने-अपने दस्तावेज और दावे पेश किए। मामला उस समय और महत्वपूर्ण हो गया जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई और दोनों पक्षों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए।
चुनाव आयोग ने TMC का नाम और ‘जोड़ाफूल’ क्यों फ्रीज किया?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को इस विवाद पर अंतरिम आदेश जारी किया। आयोग के सामने स्थिति यह थी कि दो प्रतिद्वंद्वी समूह खुद को असली TMC बता रहे थे, जबकि आगामी उपचुनावों से पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम विवाद का निपटारा करना संभव नहीं था। ऐसे में आयोग ने दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने के लिए फिलहाल मूल नाम और चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।
आयोग के आदेश के मुताबिक, फिलहाल:
- कोई भी गुट ‘All India Trinamool Congress’ नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
- दोनों गुट ‘Flowers & Grass’ यानी ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
- दोनों पक्षों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम दिए जाएंगे।
- दोनों गुटों से तीन-तीन वैकल्पिक नाम प्राथमिकता के क्रम में मांगे गए हैं।
- दोनों पक्षों को तीन-तीन फ्री चुनाव चिन्ह के विकल्प देने हैं।
- आयोग उपलब्ध विकल्पों में से प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा।
दोनों गुटों को अपने नाम और चिन्ह के विकल्प 18 सितंबर की सुबह 11 बजे तक देने का निर्देश दिया गया था। आयोग ने यह भी व्यवस्था की है कि नए नामों में दोनों गुट चाहें तो अपने मूल दल All India Trinamool Congress से संबंध का संकेत दे सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि TMC का नाम और चुनाव चिन्ह हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। यह फिलहाल अंतरिम व्यवस्था है, ताकि आगामी चुनावी प्रक्रिया प्रभावित न हो और दोनों पक्षों को एक समान स्थिति में रखा जा सके।
क्या TMC खत्म हो गई या किसी एक गुट को मिल गया पार्टी का अधिकार?
नहीं। चुनाव आयोग ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं किया है कि ममता बनर्जी या दूसरे गुट में से कौन आधिकारिक TMC है। मौजूदा आदेश का उद्देश्य केवल आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था करना है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों समूह पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि होने का दावा कर रहे हैं और इस विवाद का विस्तृत निर्धारण Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत किया जाना है। यही प्रावधान किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में विभाजन या संगठनात्मक विवाद की स्थिति में नाम और चुनाव चिन्ह पर दावे के निपटारे से संबंधित है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि चुनाव आयोग ने TMC का नाम या चुनाव चिन्ह स्थायी तौर पर किसी एक गुट को दे दिया है। अंतिम प्रक्रिया में दोनों पक्षों के संगठनात्मक दावे, दस्तावेज और पार्टी के भीतर समर्थन से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जाना है। यहां एक और महत्वपूर्ण बात है। आयोग ने अंतरिम व्यवस्था इसलिए की है क्योंकि उपचुनाव की समयसीमा नजदीक है। अगर अंतिम विवाद का फैसला होने तक चुनाव प्रक्रिया रोक दी जाती, तो उम्मीदवारों और चुनाव कार्यक्रम को लेकर समस्या पैदा हो सकती थी। इसलिए दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान देकर चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता अपनाया गया है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
इस फैसले का सबसे तत्काल असर नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव पर पड़ेगा। दोनों गुटों ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन अब वे उम्मीदवार TMC के आधिकारिक नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में नहीं उतर सकेंगे। चुनाव आयोग दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा। इसका मतलब है कि मतपत्र या ईवीएम पर दोनों गुटों के उम्मीदवारों की पहचान अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह से होगी। यह बदलाव उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिन प्रत्याशियों ने TMC के नाम के साथ नामांकन दाखिल किया था, उनकी नामांकन प्रक्रिया को आयोग द्वारा तय नई व्यवस्था के अनुरूप पूरा किया जाना होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव अधिकारियों को आयोग द्वारा नए नाम और चिन्ह आवंटित किए जाने के बाद नामांकन की आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों गुट अपने नए नाम में मूल पार्टी से संबंध का उल्लेख कर सकते हैं। यानी दोनों पक्ष पूरी तरह अलग राजनीतिक पहचान बनाने के बजाय अपने प्रस्तावित नाम में All India Trinamool Congress से लिंक रखने का विकल्प चुन सकते हैं। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य फिलहाल चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। हालांकि, मूल नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिन्ह को लेकर अंतिम अधिकार का फैसला अभी बाकी है।
ऋतब्रत गुट का रुख क्या है और ममता बनर्जी की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आई?
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ऋतब्रत बनर्जी ने आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए राजनीतिक दल के संगठन और नेतृत्व को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि “राजनीतिक पार्टी कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है” और राजनीतिक पार्टी का कोई वारिस नहीं हो सकता। उनके बयान का संदर्भ पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और नेतृत्व के विवाद से था। यह उनके गुट का राजनीतिक तर्क है, चुनाव आयोग का निष्कर्ष नहीं। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के खेमे ने आयोग के अंतरिम आदेश पर आपत्ति जताई है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने फैसले को कानून के अनुरूप नहीं बताया और कहा कि पार्टी इस आदेश को स्वीकार नहीं करती। ममता गुट ने संगठन की वैधता और अपनी ओर से पेश किए गए दावों पर भी जोर दिया है।
यानी इस समय दोनों पक्षों की स्थिति स्पष्ट रूप से अलग है। एक पक्ष आयोग के अंतरिम आदेश को अपने संगठनात्मक दावे के लिए महत्वपूर्ण मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष आदेश पर सवाल उठा रहा है। इस बीच कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आयोग के कदम पर राजनीतिक सवाल उठाए और इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के खिलाफ बताया। यह कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, इसे चुनाव आयोग के आदेश का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अब इस पूरे विवाद का अगला महत्वपूर्ण चरण चुनाव आयोग की पैराग्राफ 15 के तहत विस्तृत प्रक्रिया होगी। फिलहाल दोनों गुट उपचुनाव में अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे, जबकि मूल TMC नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिन्ह पर अंतिम अधिकार का सवाल आगे की सुनवाई में तय होना है।
TMC का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज होने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी कानूनी या राजनीतिक तौर पर समाप्त हो गई है। फिलहाल यह चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था है, जिसका तत्काल प्रभाव आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों पर पड़ेगा। एक तरफ ममता बनर्जी का गुट है, दूसरी तरफ प्रतिद्वंद्वी गुट है, और दोनों ही पार्टी के संगठन तथा आधिकारिक पहचान पर दावा कर रहे हैं। आयोग ने फिलहाल दोनों को मूल नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिन्ह से अलग रखते हुए नए नाम और चुनाव चिन्ह के साथ उपचुनाव लड़ने का रास्ता बनाया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतिम सुनवाई के बाद ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिन्ह पर अधिकार किस गुट को मिलता है। इसका जवाब चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया और अंतिम निर्णय से सामने आएगा।




