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अमित शाह के दौरे से पहले पंजाब में सियासी घमासान, AAP ने पूछे 6 सवाल

अमित शाह के दौरे से पहले पंजाब में सियासी घमासान, AAP ने पूछे 6 सवाल

द फ्रंट डेस्क: आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से पहले कई सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार पहले तीन कृषि कानूनों के जरिए पंजाब की खेती को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर चुकी है और अब उसी नीति को कथित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।

पंजाब में AAP के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पंजाब आकर लोगों को लुभाने और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अरोड़ा ने कहा कि पंजाब हमेशा मेहमानों का स्वागत करता है और किसी भी राजनीतिक नेता का यहां आना उसका अधिकार है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं को केवल वादे और भाषण देने के बजाय पंजाब के असली मुद्दों पर भी बात करनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में राहुल गांधी भी पंजाब आए थे और उन्होंने मनरेगा की बात की, लेकिन गरीब मजदूरों की वास्तविक समस्याओं पर कितना ध्यान दिया गया, यह सबके सामने है।

अमित शाह के पंजाब दौरे पर उठाए सवाल

गुरुवार को पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमन अरोड़ा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 14 मार्च को पंजाब आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार केवल जुमले और भाषण देकर लौटने के बजाय उन्हें पंजाब से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के लोग उम्मीद करते हैं कि अमित शाह राज्य के प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता दिखाते हुए किसानों, मजदूरों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर ठोस चर्चा करेंगे और उनके समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।

6 सवालों के जवाब दें शाह: अमन अरोड़ा

अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के लगभग तीन करोड़ लोगों की ओर से वह अमित शाह से छह अहम सवाल पूछना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ये सवाल पंजाब की अर्थव्यवस्था, किसानों और राज्य के विकास से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाते हैं और उन्हें मंडियों तक पहुंचाते हैं, लेकिन रूरल डेवलपमेंट फंड (RDF) और मार्केट डेवलपमेंट फंड (MDF) के करीब 8300 करोड़ रुपये कई वर्षों से केंद्र सरकार द्वारा जारी नहीं किए गए हैं। अरोड़ा ने कहा कि यह राशि ग्रामीण बुनियादी ढांचे, गांवों के विकास, सड़कों और मंडियों के निर्माण के लिए खर्च की जानी थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि 14 मार्च को अपनी रैली के दौरान अमित शाह यह घोषणा करेंगे कि केंद्र सरकार यह 8300 करोड़ रुपये जल्द जारी करेगी, ताकि राज्य में विकास कार्यों को गति मिल सके।

जीएसटी मुआवजा बंद होने से पंजाब को भारी नुकसान

अरोड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2017 में जीएसटी व्यवस्था लागू की थी और पंजाब, जिसे देश का “फूड बाउल” कहा जाता है, को पांच साल तक जीएसटी मुआवजा दिया गया। लेकिन 2022 में यह मुआवजा बंद कर दिया गया, जिससे राज्य को करीब 55 से 60 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने इस नुकसान की भरपाई को लेकर कोई फैसला किया है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। और अगर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, तो कम से कम यह भरोसा दिया जाए कि 2027 के चुनाव से पहले पंजाब के इस घाटे की भरपाई की जाएगी।

कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि हाल के समय में पंजाब ने भयंकर बाढ़ का सामना किया था। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य का दौरा किया और हवाई सर्वेक्षण के बाद 1600 करोड़ रुपये की सहायता का ऐलान किया था। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि घोषित किए गए 1600 करोड़ रुपये में से एक रुपया भी पंजाब को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अमित शाह जब पंजाब आएं तो या तो यह राशि जारी करके आएं या फिर यह स्पष्ट करें कि यह पैसा कब तक जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर अब तक यह पैसा जारी नहीं हुआ है तो इसके पीछे क्या कारण है, इसका जवाब भी पंजाब के लोगों को मिलना चाहिए।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सवाल

अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले तीन कृषि कानूनों के जरिए पंजाब की खेती को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी। लेकिन किसानों के विरोध के बाद सरकार को वे कानून वापस लेने पड़े। उन्होंने कहा कि अब उसी नीति को कथित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए लागू करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक इस समझौते के तहत केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में ऐसी शर्तें मान रही है, जिनका असर देश के किसानों, छोटे व्यापारियों और खासकर पंजाब के कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। अरोड़ा ने कहा कि इस तरह के समझौतों में आखिर बीजेपी नेताओं, उनकी पार्टी और केंद्र सरकार का क्या हित है, यह भी देश के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए।

नशे के मुद्दे पर भी केंद्र को घेरा

अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार पिछले एक साल से राज्य में नशे के खिलाफ अभियान चला रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस समस्या से लड़ाई केवल पंजाब अकेले नहीं जीत सकता। उन्होंने बताया कि पंजाब की करीब 543 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिससे यह इलाका संवेदनशील बन जाता है। इसके अलावा राजस्थान और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों के रास्ते भी नशे की तस्करी के मामले सामने आते हैं। कई बार गुजरात के बंदरगाहों के जरिए भी नशे की खेप देश में प्रवेश करती है और पंजाब तक पहुंचती है। अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार और राज्य के लोग नशे के खिलाफ इस लड़ाई में केंद्र सरकार और भाजपा से ठोस सहयोग की उम्मीद करते हैं।

अमन अरोड़ा ने कहा कि लंबे समय से पड़ोसी पहाड़ी राज्यों—हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड—को उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाते रहे हैं। इन रियायतों के कारण पंजाब के उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सीमा लंबे समय तक बंद रहने से दूसरे देशों के साथ व्यापार भी प्रभावित हुआ, जिससे पंजाब के व्यापार और उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ा। अरोड़ा ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में पंजाब के उद्योगों और व्यापारियों को बचाने के लिए क्या केंद्र सरकार कोई विशेष आर्थिक पैकेज देने जा रही है या नहीं। उन्होंने कहा, “शाह साहब, पंजाब आपका स्वागत करता है, लेकिन यहां आकर इन सवालों के जवाब देकर ही जाना। सिर्फ जुमले और वादे करके वापस नहीं जाना चाहिए।” अंत में अरोड़ा ने कहा कि पंजाब पहले से कई समस्याओं का सामना कर रहा है। कभी चंडीगढ़ का मुद्दा उठता है तो कभी पंजाब के पानी को लेकर विवाद होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर भाजपा और केंद्र सरकार बार-बार राजनीति करती रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के जख्म पहले ही गहरे हैं, इसलिए उन्हें और कुरेदने के बजाय उन पर मरहम लगाने की जरूरत है।

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