Online bahis kullanıcılarının %54’ü haftada en az bir kez canlı bahis oynamaktadır; bu oran bahsegel giriş platformunda %63’tür.

Engellemelerden etkilenmemek için bettilt sık sık kontrol ediliyor.

Bahsegel güncel giriş bahsegel bettilt

OECD raporları, kullanıcıların %52’sinin “kayıp limiti” belirleyen platformları tercih ettiğini göstermektedir; paribahis bu özelliği destekler.

bahsegel giriş bettilt bahsegel bahsegel giriş bahsegel

जेल या बेल? अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर कल सुनवाई, हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

जेल या बेल? अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर कल सुनवाई, हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

द फ्रंट डेस्क: पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की कानूनी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। 21 फरवरी को प्रयागराज के धूमनगंज थाने में दर्ज एफआईआर के बाद अब यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है। स्वामी और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर 27 फरवरी को अहम सुनवाई होनी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच इस याचिका पर दोपहर बाद सुनवाई करेगी। मामले की गंभीरता और उससे जुड़े सामाजिक-धार्मिक आयामों को देखते हुए पूरे प्रदेश की निगाहें हाई कोर्ट पर टिकी हैं।

एफआईआर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य और दो-तीन अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप एक नाबालिग से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों कथित पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है। एक पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया गया है, जबकि दूसरे का परीक्षा के कारण अभी लंबित बताया गया है। पुलिस का दावा है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

आरोपों से इनकार, जांच पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसका उद्देश्य उनकी छवि को धूमिल करना है। उन्होंने दावा किया कि कथित पीड़ित बच्चों से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को वे अदालत में प्रस्तुत करेंगे। स्वामी ने शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच के दौरान पुलिसकर्मी शिकायतकर्ता के साथ दिखाई दे रहे हैं, तो निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। उन्होंने 17 जनवरी की कथित घटना को भी पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि सच अदालत में सामने आएगा।

सियासी बयानबाजी ने पकड़ा जोर

यह मामला अब केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासत का मुद्दा भी बन गया है। स्वामी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है और पुलिस की जांच रिपोर्ट तक मीडिया में लीक हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ‘अहंकार’ और ‘दमनकारी रवैये’ के साथ असहमति की आवाज को दबा रही है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा कानून के राज की वकालत करते रहे हैं, चाहे मामला किसी बड़े आपराधिक गिरोह से जुड़ा हो या धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल हो। साधु-संतों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्य के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम संतों की स्थिति क्या होगी।

मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला

इस पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया, जब स्वामी के समर्थकों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने केस संख्या 4177/in/2026 दर्ज कर लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिना पर्याप्त साक्ष्यों के पुलिस शक्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है और धार्मिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, NHRC इस मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर सकता है।

हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी उम्मीदें

24 फरवरी को दाखिल की गई अग्रिम जमानत याचिका में स्वामी और अन्य आरोपियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी जाए। यह याचिका संभावित गिरफ्तारी और आगे की पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर की गई है। अब सबसे अहम सवाल यही है—क्या हाई कोर्ट स्वामी को राहत देगा या पुलिस कार्रवाई का रास्ता साफ होगा? यदि अग्रिम जमानत मिलती है तो गिरफ्तारी पर रोक लग सकती है, वहीं याचिका खारिज होने की स्थिति में गिरफ्तारी की संभावना बढ़ जाएगी। कानूनी, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इस मामले का अगला अध्याय अब अदालत के फैसले से तय होगा। कल की सुनवाई से स्पष्ट होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा जेल होगा या बेल इसका फैसला अब हाई कोर्ट के हाथ में है।

Share post:

Popular

More like this
Related