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राजधानी में गोलियों की गूंज: 17 दिन में पांच मर्डर, क्या देहरादून में सक्रिय हो रहे बाहरी गैंग? पूरा मामला

राजधानी में गोलियों की गूंज: 17 दिन में पांच मर्डर, क्या देहरादून में सक्रिय हो रहे बाहरी गैंग? पूरा मामला

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जिसे लंबे समय तक शांत और सुरक्षित शहर के रूप में जाना जाता रहा है, इन दिनों लगातार हो रही हत्याओं से दहला हुआ है। 17 दिनों के भीतर पांच हत्याओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा वारदात राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल में हुई, जहां दिनदहाड़े गोली मारकर एक कारोबारी की हत्या कर दी गई। इससे पहले गुंजन हत्याकांड और तिब्बत मार्केट गोलीकांड ने भी शहर की शांति को झकझोर दिया था। पॉश इलाके में हुई इस घटना के बाद आम लोगों में डर का माहौल है। लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि अब देहरादून में भी बाहर निकलने से पहले सोचना पड़ता है।

सिल्वर सिटी मॉल में दिनदहाड़े गोलियां

पुलिस के अनुसार 45 वर्षीय विक्रम शर्मा सुबह करीब 9 बजे जिम के लिए सिल्वर सिटी मॉल पहुंचे थे। रोज की तरह उन्होंने वर्कआउट किया और करीब 10:30 बजे जब वे जिम से नीचे उतर रहे थे, तभी दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गोलियां इतनी तेजी से चलीं कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तीन गोलियां लगते ही वे सीढ़ियों पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

जांच में सामने आया है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे। तीसरा आरोपी मुख्य सड़क पर बाइक स्टार्ट कर खड़ा था ताकि वारदात के तुरंत बाद फरार हो सकें। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और पुलिस का दावा है कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया कि मृतक के पास लाइसेंसी पिस्टल थी, लेकिन हमले की रफ्तार इतनी तेज थी कि वे उसका इस्तेमाल नहीं कर सके।

मृतक का बैकग्राउंड और गैंगवार की आशंका

जांच एजेंसियां इस हत्या को सिर्फ एक कारोबारी की हत्या नहीं, बल्कि संभावित गैंगवार के एंगल से देख रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतक विक्रम शर्मा पर अन्य राज्यों में भी कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। आशंका जताई जा रही है कि यह वारदात झारखंड के किसी प्रतिद्वंद्वी गिरोह से जुड़ी हो सकती है और पुरानी रंजिश के चलते देहरादून में आकर हत्या की गई। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक रूप से किसी गैंग का नाम नहीं लिया है और जांच कई एंगल से की जा रही है।

17 दिन में कहां-कहां हुईं हत्याएं?

देहरादून में हाल के दिनों में हुई घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली और खुफिया तंत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं। गुंजन हत्याकांड ने शहर को चौंकाया था, जिसके बाद तिब्बत मार्केट के पास गोलीकांड हुआ। अब सिल्वर सिटी मॉल में हत्या ने यह संकेत दिया है कि अपराधी बेखौफ होकर भीड़भाड़ वाले इलाकों को भी निशाना बना रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की कड़ियां जोड़कर जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये अलग-अलग घटनाएं हैं या किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा।

जनता में खौफ और बढ़ती नाराजगी

राजपुर रोड जैसे इलाके को देहरादून का सबसे सुरक्षित और हाई-प्रोफाइल क्षेत्र माना जाता है। यहां मॉल, मल्टीप्लेक्स, बड़े रेस्टोरेंट और होटल हैं, जहां रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं। ऐसे इलाके में दिनदहाड़े गोलीबारी ने आम नागरिकों को डरा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले देहरादून में इस तरह की घटनाएं कम होती थीं, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। लोगों की मांग है कि पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, बाहरी संदिग्ध तत्वों की जांच कड़ी की जाए और शहर में सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

देहरादून पुलिस ने वारदात के बाद तुरंत शहर के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर नाकेबंदी की। एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीमें भी जांच में जुटी हैं। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। इसके अलावा मृतक के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और दुश्मनी की सूची भी खंगाली जा रही है।

मुख्यमंत्री का सख्त संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा न जाए। मुख्यमंत्री ने डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है और राजधानी में कानून-व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दोहराया कि राज्य में संगठित अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति लागू है और आगे भी सख्ती जारी रहेगी।

क्या देहरादून बन रहा है बाहरी गैंग्स का ठिकाना?

लगातार हो रही घटनाओं के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या देहरादून अब बाहरी आपराधिक गिरोहों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है। कुछ मामलों में बाहर से आए अपराधियों की भूमिका की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

आगे क्या?

फिलहाल शहर में हाई अलर्ट है और पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। लेकिन 17 दिनों में पांच हत्याओं ने देहरादून की शांत छवि को गहरा झटका दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस कब तक आरोपियों को गिरफ्तार करती है और सरकार राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। देहरादून की सड़कों पर इस वक्त सिर्फ पुलिस की गाड़ियां नहीं दौड़ रहीं, बल्कि एक सवाल भी गूंज रहा है कि क्या राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था समय रहते खुद को संभाल पाएगी?

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