Online bahis kullanıcılarının %54’ü haftada en az bir kez canlı bahis oynamaktadır; bu oran bahsegel giriş platformunda %63’tür.

Engellemelerden etkilenmemek için bettilt sık sık kontrol ediliyor.

Bahsegel güncel giriş bahsegel bettilt

OECD raporları, kullanıcıların %52’sinin “kayıp limiti” belirleyen platformları tercih ettiğini göstermektedir; paribahis bu özelliği destekler.

bahsegel giriş bettilt bahsegel bahsegel giriş bahsegel

‘गोदान’ फिल्म विवाद: टीज़र से भड़का बवाल, मुस्लिम समुदाय को खलनायक दिखाने के आरोप, बॉयकॉट से लेकर बैन की मांग तक

‘गोदान’ फिल्म विवाद: टीज़र से भड़का बवाल, मुस्लिम समुदाय को खलनायक दिखाने के आरोप, बॉयकॉट से लेकर बैन की मांग तक

फिल्मों को समाज का आईना कहा जाता है, लेकिन जब वही सिनेमा किसी समुदाय को निशाने पर लेने का आरोप झेले, तो बहस सिर्फ कला तक सीमित नहीं रहती। निर्देशक अमित प्रजापति की अपकमिंग फिल्म ‘गोदान’ का टीज़र रिलीज़ होते ही ऐसा ही विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि फिल्म के टीज़र में मुस्लिम समाज को खलनायक के रूप में दिखाया गया है, जिसके बाद बॉयकॉट से लेकर फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने तक की मांग उठने लगी है।


टीज़र में क्या है आपत्तिजनक?

विवाद की जड़ फिल्म के उस दृश्य को बताया जा रहा है, जिसमें टोपी पहने एक मुस्लिम व्यक्ति पर पुलिसकर्मी पिस्टल ताने हुए आपत्तिजनक टिप्पणी करता दिखाई देता है। विरोध करने वालों का कहना है कि यह दृश्य सिर्फ एक किरदार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मुस्लिम समाज को अपराध और हिंसा से जोड़ने की कोशिश करता है।
टीज़र सामने आते ही सोशल मीडिया पर फिल्म के खिलाफ नाराज़गी बढ़ गई और बॉयकॉट की अपील शुरू हो गई।


मौलाना इशहाक गोड़ा की खुली अपील

फिल्म को लेकर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इशहाक गोड़ा ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि अब बॉलीवुड फिल्मों के ज़रिए समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है।
मौलाना इशहाक गोड़ा ने मुस्लिम समाज के साथ-साथ अमन पसंद लोगों से अपील की है कि वे फिल्म ‘गोदान’ का विरोध करें और इसका बॉयकॉट करें।


कांग्रेस ने भी किया विरोध

कांग्रेस पार्टी के नेता और प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने भी फिल्म पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फिल्म ‘गोदान’ की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की है। अंशू अवस्थी का कहना है कि यह फिल्म समाज में नफरत फैलाने वाली है और किसी एक वर्ग को निशाना बनाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।


‘गाय बचाओ’ के संदेश पर सवाल

फिल्म के निर्माताओं का दावा है कि ‘गोदान’ गाय को बचाने के संदेश पर आधारित है। लेकिन कांग्रेस नेता अंशू अवस्थी ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भारत और उत्तर प्रदेश बीफ एक्सपोर्ट में आगे हैं, तो इसके लिए सिर्फ मुस्लिम समाज को दोषी ठहराना गलत है।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों के लिए मुस्लिम समाज को जिम्मेदार ठहराना नफरत फैलाने जैसा है।


भाजपा सरकार पर भी निशाना

अंशू अवस्थी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में कई नेता मांस सप्लाई के कारोबार से जुड़े रहे हैं, इसके बावजूद गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर सरकार चुप्पी साधे हुए है।
उन्होंने कहा कि फिल्में समाज को शिक्षा और सीख देने के लिए बननी चाहिए, न कि नफरत फैलाने और जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए।


क्या कहता है यह विवाद

‘गोदान’ फिल्म को लेकर उठा विवाद एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या सिनेमा सामाजिक संदेश के नाम पर धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रहा है। किसी विशेष समुदाय को बार-बार नकारात्मक रूप में दिखाना क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में आता है, या फिर यह सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है—इस पर बहस तेज़ हो गई है।


अब आगे क्या?

फिलहाल फिल्म के निर्माताओं की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह धार्मिक नेताओं, राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर विरोध तेज़ हो रहा है, उससे साफ है कि ‘गोदान’ की रिलीज़ से पहले यह विवाद और गहराने वाला है।

‘गोदान’ फिल्म पर मचा बवाल सिर्फ एक टीज़र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिनेमा, राजनीति और सामाजिक जिम्मेदारी के टकराव की तस्वीर पेश करता है। सवाल यही है कि क्या फिल्मों का उद्देश्य समाज को जोड़ना है या फिर ऐसी कहानियों के ज़रिए समाज को और ज़्यादा बांटना। आने वाले दिनों में इस विवाद पर सरकार और सेंसर बोर्ड का रुख क्या होता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

Share post:

Popular

More like this
Related