मुस्लिम दुकान का नाम, बजरंग दल का विरोध और ‘मोहम्मद दीपक’: उत्तराखंड में कैसे बढ़ता गया विवाद, अब तक क्या हुआ

उत्तराखंड के कोटद्वार से शुरू हुआ ‘मोहम्मद दीपक’ विवाद अब सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पोस्ट, जिम संचालकों के समर्थन, हिंदू संगठनों के विरोध, सड़क पर प्रदर्शन और FIR तक पहुंच चुका यह मामला अब कानून-व्यवस्था का बड़ा मुद्दा बन गया है। विवाद को लेकर अलग-अलग शहरों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। आइए, पूरे घटनाक्रम को क्रमवार समझते हैं।


विवाद की जड़: 26 जनवरी की घटना

पूरा मामला 26 जनवरी को कोटद्वार में सामने आया। पटेल मार्ग पर एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में लगे ‘बाबा’ शब्द को लेकर बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। कार्यकर्ताओं का कहना था कि दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और दुकानदार को नाम बदलना होगा।

इसी दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कुछ कार्यकर्ता बुजुर्ग दुकानदार से बहस करते दिखाई दिए। वीडियो में माहौल तनावपूर्ण नजर आया। तभी वहां मौजूद दीपक कुमार नाम का एक युवक दुकानदार के समर्थन में सामने आया और उसने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया।


वीडियो वायरल, बढ़ा विवाद

वायरल वीडियो में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होती दिखी। बात इतनी बढ़ गई कि दीपक और उनके साथियों ने कथित तौर पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को वहां से हटा दिया। यहीं से यह मामला तूल पकड़ गया और स्थानीय विवाद धीरे-धीरे बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे में बदलने लगा।


31 जनवरी: कोटद्वार में हंगामा और FIR

घटना के कुछ दिनों बाद, 31 जनवरी को देहरादून से बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे।

  • मालवीय उद्यान में प्रदर्शन किया गया
  • शहर में जुलूस निकाला गया
  • दीपक कुमार और विजय रावत के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने एहतियातन दीपक कुमार और विजय रावत को कोतवाली ले जाकर बैठा दिया। इसके बाद पुलिस ने दीपक कुमार के खिलाफ FIR दर्ज की। पुलिस के मुताबिक शिकायतों में गाली-गलौज, जाति-सूचक शब्दों के इस्तेमाल और जान से मारने की नीयत से हमला करने जैसे आरोप शामिल हैं।


सोशल मीडिया पर ट्रेंड: ‘मैं भी मोहम्मद दीपक’

FIR दर्ज होने के बाद मामला सोशल मीडिया तक पहुंच गया। दीपक के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग ‘मैं भी मोहम्मद दीपक’ लिखकर पोस्ट करने लगे। समर्थकों का कहना था कि दीपक ने संविधान और इंसानियत के पक्ष में आवाज़ उठाई है।

इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दीपक की तारीफ करते हुए लिखा कि वह संविधान और इंसानियत के लिए खड़े हैं। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद और ज्यादा राजनीतिक रंग लेने लगा।


रुद्रपुर तक कैसे पहुंचा विवाद?

कोटद्वार से शुरू हुआ यह विवाद अब उधम सिंह नगर के रुद्रपुर तक पहुंच गया। यहां के एक जिम संचालक मोहित चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर ‘मैं भी मोहम्मद दीपक’ लिखकर पोस्ट कर दी।

इस पोस्ट के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भड़क गए।

  • मोहित चोपड़ा के जिम के बाहर नारेबाजी
  • विरोध प्रदर्शन
  • पुलिस को शिकायत सौंपकर मुकदमा दर्ज करने की मांग

हिंदू संगठनों के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो वे खुद मोहित से “निपटेंगे।” इसके बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी


कोटद्वार में फिर बढ़ा तनाव

इधर कोटद्वार में भी हालात पूरी तरह शांत नहीं हो सके। जानकारी के मुताबिक देहरादून से बड़ी संख्या में बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता एक बार फिर कोटद्वार पहुंचे।

  • शहर में दोबारा जुलूस निकाला गया
  • दीपक के जिम के बाहर प्रदर्शन हुआ
  • सड़कों पर भारी भीड़ जमा होने से जाम की स्थिति बनी

भीड़ को हटाने और हालात काबू में रखने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।


दीपक कुमार का पक्ष

दीपक कुमार ने ANI से बातचीत में कहा,

“हम रिपब्लिक डे मना रहे थे। तभी कुछ लोग हमारे दोस्त की दुकान पर पहुंचे और नाम को लेकर बदतमीज़ी करने लगे। मैंने उन्हें रोका, लेकिन उन्होंने कहा कि उनके धर्म में ‘बाबा’ शब्द सिर्फ एक खास संदर्भ में इस्तेमाल होता है। वहीं से बात बिगड़ गई।”

दीपक का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनके खिलाफ FIR क्यों दर्ज की गई, जबकि विवाद की शुरुआत दूसरी तरफ से हुई थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं हैं, बल्कि एक विचारधारा में विश्वास रखते हैं।


अब हालात क्या हैं?

  • दीपक कुमार के खिलाफ FIR दर्ज
  • रुद्रपुर में जिम संचालक के खिलाफ शिकायत
  • कोटद्वार और रुद्रपुर दोनों जगह पुलिस अलर्ट
  • सोशल मीडिया और सियासत में मामला लगातार गरम

‘मोहम्मद दीपक’ विवाद अब सिर्फ एक नाम या एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा। यह मामला धार्मिक पहचान, अभिव्यक्ति की आज़ादी, कानून-व्यवस्था और राजनीति के बीच उलझ चुका है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है हालात को शांत रखना और निष्पक्ष कार्रवाई करना। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और प्रशासनिक फैसले तय करेंगे कि यह विवाद शांत होता है या और गहराता है।

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