कड़ाके की ठंड में जब लोग रजाई से बाहर निकलने में भी हिचकते हैं, तब Pathankot के राजू भिखारी ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की कि दिल खुद-ब-खुद गर्म हो गए। नाम भले ही भिखारी हो, लेकिन काम ऐसे कि बड़े-बड़े अमीर भी शर्मसार हो जाएं। राजू ने करीब 500 कंबल जरूरतमंदों में बांटकर सर्द रातों में राहत पहुंचाई—वो भी बिना किसी दिखावे के।
ठंड अपने पूरे तेवर दिखा रही थी और सड़कों पर जिंदगी से जूझ रहे लोगों के लिए एक कंबल किसी वरदान से कम नहीं था। ऐसे में राजू खुद गलियों-सड़कों पर निकले, जरूरतमंदों तक कंबल पहुंचाए और खामोशी से लौट आए। न कैमरे, न शोर—बस सच्ची मानवता।
पहले भी बटोर चुके हैं सराहना
यह पहला मौका नहीं है जब राजू चर्चा में आए हों। कोविड काल में उनके सामाजिक योगदान की तारीफ खुद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में की थी। किसी आम आदमी के काम का देश के सबसे बड़े मंच से जिक्र होना, राजू की नीयत और मेहनत दोनों की गवाही देता है।
सोशल मीडिया पर ‘रियल लाइफ हीरो’
राजू के इस नेक कदम की तस्वीरें और किस्से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। यूजर्स उन्हें रियल लाइफ हीरो बता रहे हैं। कोई लिख रहा है—“नाम भिखारी, दिल करोड़ों का।” तो कोई कह रहा—“अगर हर शहर में ऐसे लोग हों, तो ठंड में कोई कांपे नहीं।”
राजू भिखारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत किसी नाम, हैसियत या पहचान की मोहताज नहीं होती—वो बस दिल से निकलती है।




