ईरान में पिछले एक महीने से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब गंभीर और हिंसक रूप ले लिया है। राजधानी तेहरान के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि शहर के केवल छह अस्पतालों में ही कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाओं पर लगभग पूरी तरह से रोक लगा रखी है और जमीनी हालात को लेकर जानकारी बेहद सीमित हो गई है।
डॉक्टर का बड़ा दावा: गोलीबारी से हुईं ज्यादातर मौतें
पहचान उजागर न करने की शर्त पर ईरानी डॉक्टर ने टाइम मैगजीन से बातचीत में बताया कि मृतकों में अधिकांश की मौत सीधी गोलीबारी के कारण हुई है। डॉक्टर के मुताबिक, जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन तेज होते गए, सुरक्षाबलों ने कई इलाकों में भीड़ को तितर-बितर करने के बजाय सीधे गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
डॉक्टर ने दावा किया कि शुक्रवार को कई अस्पतालों से एक साथ बड़ी संख्या में शव हटाए गए, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
‘पुलिस स्टेशन के बाहर मशीनगन से फायरिंग’
डॉक्टर के अनुसार, उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर मशीनगन से फायरिंग की गई, जिसमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए। इस एक घटना में ही कम से कम 30 लोगों को गोलियां लगने की बात कही गई है। डॉक्टर का कहना है कि अस्पतालों में घायल प्रदर्शनकारियों को लाने से पहले कई बार सुरक्षा एजेंसियों ने शवों और घायलों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश भी की।
पूरे देश में फैले प्रदर्शन
ईरान में ये प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुए थे, जो अब देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। अमेरिका में निर्वासन में रह रहे किंग रजा पहलवी की हालिया अपील के बाद विरोध और तेज हो गया। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर इस्लामी शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और आज़ादी, लोकतंत्र और तानाशाही के अंत की मांग कर रहे हैं। कई जगहों पर ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘आजादी’ जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं।
संचार पर सख्त पाबंदी
प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ईरानी सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल कॉल सेवाओं पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच लगभग बंद कर दी गई है, जिससे अंदर की तस्वीरें और वीडियो बाहर नहीं आ पा रहे हैं। यही वजह है कि मौतों और घायलों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े अलग
वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के अनुसार, अब तक कम से कम 63 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 49 आम नागरिक शामिल बताए गए हैं। मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े डॉक्टर के दावे से काफी कम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिया पर सरकारी नियंत्रण, विदेशी पत्रकारों की अनुपस्थिति और इंटरनेट बैन के कारण सटीक आंकड़े सामने आना बेहद मुश्किल हो गया है।
सरकार का सख्त रुख और चेतावनी
तेहरान के सरकारी वकील ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि हिंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों को मौत की सजा तक दी जा सकती है। वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ट्रंप की चेतावनी
इन घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही, तो ईरान को बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है।
कुल मिलाकर, ईरान इस वक्त एक गहरे आंतरिक संकट से गुजर रहा है। डॉक्टर के 217 मौतों के दावे, मशीनगन से फायरिंग के आरोप, संचार प्रतिबंध और सरकार की सख्त चेतावनियां—ये सभी संकेत देते हैं कि हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। हालांकि वास्तविक मौतों की संख्या क्या है, यह फिलहाल साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों ने देश और दुनिया दोनों को झकझोर कर रख दिया है।




