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फैज-ए-इलाही मस्जिद के बाहर बुलडोज़र कार्रवाई क्यों हुई? जमीन किसकी थी, कोर्ट और सरकार ने क्या तय किया,जानिए पूरा मामला

फैज-ए-इलाही मस्जिद के बाहर बुलडोज़र कार्रवाई क्यों हुई? जमीन किसकी थी, कोर्ट और सरकार ने क्या तय किया,जानिए पूरा मामला

दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई बुलडोज़र कार्रवाई के बाद इलाके में तनावपूर्ण हालात बने रहे। मंगलवार देर रात Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने मस्जिद से सटे कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की, जिसके बाद पथराव की घटना हुई और पुलिस को हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान चांदनी महल थाने के प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें थाना प्रभारी की हालत गंभीर बताई जा रही है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

इस मामले की शुरुआत Save India Foundation की शिकायत से हुई थी। संस्था ने आरोप लगाया था कि तुर्कमान गेट के पास स्थित रमलीला ग्राउंड की सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा किया गया है और वहां शादी-बारात घर, पार्किंग और निजी क्लिनिक/डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हुई और मामला अदालत तक पहुंचा।

संयुक्त सर्वे में क्या सामने आया?

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए Land and Development Office, Delhi Development Authority और MCD ने मिलकर संयुक्त सर्वे कराया।
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक:

  • करीब 2,512 वर्ग फुट क्षेत्र में सीधा अतिक्रमण पाया गया

  • रमलीला ग्राउंड की सरकारी जमीन के 36,428 वर्ग फुट हिस्से पर कब्ज़ा होने की पुष्टि हुई

  • यहां बारात घर, पार्किंग और निजी मेडिकल सुविधाएं संचालित पाई गईं

जमीन को सरकारी कैसे माना गया?

सरकारी एजेंसियों ने 1952 से 1972 तक के रिकॉर्ड की जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जमीन भारत सरकार की है और यह L&DO के रिकॉर्ड में दर्ज है। वक्फ बोर्ड के नाम किसी भी तरह का ट्रांसफर या अतिरिक्त अलॉटमेंट दर्ज नहीं मिला। इन्हीं तथ्यों के आधार पर मामला Delhi High Court पहुंचा।

हाईकोर्ट के निर्देश क्या थे?

दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि:

  • अगर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है तो उसे हटाया जाए

  • तीन महीने के भीतर Action Taken Report (ATR) दाखिल की जाए

  • कार्रवाई से पहले सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए

सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें

पहली सुनवाई में मस्जिद प्रबंधन ने दावा किया कि मस्जिद 100 साल से ज्यादा पुरानी है, यह वक्फ की संपत्ति है और बारात घर चलाने के आरोप गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खाली जगह का कभी-कभी सामाजिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होता है और जमीन को कब्रिस्तान बताया।
वहीं, DDA और L&DO ने अदालत में कहा कि जमीन हमेशा भारत सरकार की रही है और वक्फ बोर्ड के पास मालिकाना हक से जुड़ा कोई ठोस दस्तावेज़ नहीं है।

दूसरी सुनवाई में वक्फ बोर्ड ने 1970 की गजट नोटिफिकेशन का हवाला दिया, लेकिन सरकारी एजेंसियों ने 15 फरवरी 1940 की लीज डीड पेश की, जिसके मुताबिक मस्जिद को सिर्फ 0.195 एकड़ जमीन दी गई थी। इसके आगे किसी अतिरिक्त जमीन के लिए कोई वैध लीज या अलॉटमेंट मौजूद नहीं पाया गया।

MCD का अंतिम आदेश क्या रहा?

सभी रिकॉर्ड और अदालत के निर्देशों के बाद MCD ने Final Order जारी किया। आदेश में साफ कहा गया कि:

  • सिर्फ 0.195 एकड़ जमीन पर ही वैध अधिकार साबित हुआ

  • इससे बाहर की जमीन भारत सरकार (L&DO) की है

  • सरकारी जमीन पर शादी स्थल, पार्किंग, क्लिनिक या किसी भी तरह की कमाई से जुड़ी गतिविधियां नहीं चल सकतीं

इसी आधार पर तय सीमा से बाहर बनी संरचनाओं को अतिक्रमण मानते हुए हटाने की कार्रवाई की गई।

बुलडोज़र कार्रवाई के दौरान क्या हुआ?

मंगलवार देर रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में MCD की टीमें करीब 30 बुलडोज़रों के साथ मौके पर पहुंचीं और अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने MCD और पुलिस टीम पर पथराव कर दिया। हालात बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई।

आतंकी उमर कनेक्शन कैसे सामने आया?

इसी बीच दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि लाल किला बम धमाके का आरोपी आतंकी उमर वारदात से पहले इसी इलाके में देखा गया था। सीसीटीवी फुटेज में उसे फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास और मस्जिद के अंदर करीब 15–20 मिनट तक मौजूद देखा गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह वहां क्यों गया था और किन लोगों से उसकी मुलाकात हुई थी। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि बुलडोज़र कार्रवाई का आतंकी जांच से कोई सीधा संबंध नहीं है।

पथराव की घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। सीसीटीवी और बॉडी वॉर्न कैमरों की फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

प्रशासन का क्या कहना है?

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक स्थल के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं, मस्जिद कमेटी का दावा है कि गिराया गया ढांचा 100 साल से ज्यादा पुराना था और मस्जिद परिसर का हिस्सा था।

तुर्कमान गेट का यह मामला धर्म से जुड़ा नहीं, बल्कि सरकारी जमीन, अतिक्रमण और कानून व्यवस्था से जुड़ा विवाद है। बुलडोज़र कार्रवाई अदालत के आदेश, सरकारी रिकॉर्ड और संयुक्त सर्वे के आधार पर की गई, जबकि पथराव और आतंकी कनेक्शन की जांच अलग-अलग एंगल से जारी है।

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