बांग्लादेश में तारिक रहमान की वापसी: ढाका की सियासत में भूचाल, भारत के लिए उम्मीद या खतरे की घंटी?

बांग्लादेश में तारिक रहमान की वापसी: ढाका की सियासत में भूचाल, भारत के लिए उम्मीद या खतरे की घंटी?

करीब 17 साल बाद तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी को देश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम से जहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इसका असर पड़ोसी देश की राजनीतिक स्थिरता, सुरक्षा और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ सकता है।

क्या है ताज़ा खबर?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे और BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को लंदन से ढाका लौट रहे हैं।
वे अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा रहमान के साथ लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से बिमान बांग्लादेश की फ्लाइट से रवाना हो चुके हैं। उनके दोपहर तक ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। करीब दो दशकों तक निर्वासन में रहने के बाद उनकी यह वापसी केवल बांग्लादेश की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके क्षेत्रीय प्रभावों पर भी नजर रखी जा रही है।

निर्वासन से वापसी तक का सफर

तारिक रहमान का जन्म 1965 में हुआ था, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान वे एक बच्चे थे और कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिए गए थे। BNP उन्हें दुनिया के सबसे कम उम्र के युद्धबंदियों में से एक के तौर पर पेश करती रही है।उनके पिता जियाउर रहमान बांग्लादेशी सेना के प्रमुख थे और 1975 के तख्तापलट के बाद सत्ता में आए। उसी तख्तापलट में बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या हुई थी। यही घटना आगे चलकर जिया और हसीना परिवारों के बीच दशकों से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की वजह बनी, जिसे ‘बैटल ऑफ द बেগम्स’ कहा जाता है।

खालिदा जिया की विरासत और तारिक की भूमिका

जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया ने BNP की कमान संभाली और तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। तारिक रहमान उनके बड़े बेटे हैं। उनके छोटे बेटे अराफात रहमान कोको का 2015 में थाईलैंड में निधन हो गया था।2000 के शुरुआती वर्षों में खालिदा जिया सरकार के दौरान तारिक रहमान को सत्ता के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता था। उनका नाम ‘हावा भवन’ नामक कथित समानांतर सत्ता केंद्र से जुड़ा, जिस पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक सौदेबाजी के आरोप लगे।

17 साल लंदन में क्यों रहे?

2007 में सेना समर्थित अंतरिम सरकार ने तारिक रहमान को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किया था। वे करीब डेढ़ साल जेल में रहे और इस दौरान हिरासत में प्रताड़ना के आरोप भी लगाए।
2008 में जमानत मिलने के बाद वे इलाज के बहाने लंदन चले गए और वहीं रह गए। इसके बाद शेख हसीना सरकार ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और 2004 में अवामी लीग की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए। उस हमले में शेख हसीना बाल-बाल बच गई थीं, लेकिन 26 लोगों की मौत हो गई थी। तारिक को उनकी अनुपस्थिति में सजा सुनाई गई, जिसे BNP ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।लंदन में रहते हुए भी तारिक रहमान वीडियो कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए पार्टी की गतिविधियों को संचालित करते रहे।

सत्ता परिवर्तन और वापसी का रास्ता

2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। इसके बाद तारिक रहमान से जुड़े कई मामलों में राहत मिली या वे बरी कर दिए गए। इसी के साथ उनकी बांग्लादेश वापसी का रास्ता साफ हो गया।

बांग्लादेश की राजनीति में क्या बदल सकता है?

अंतरिम सरकार ने 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव कराने की घोषणा की है। आवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद BNP को खुद को सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करने का मौका मिला है।
हालिया सर्वेक्षणों में संकेत मिले हैं कि आगामी चुनावों में BNP को बढ़त मिल सकती है। ऐसे में तारिक रहमान की वापसी पार्टी को नया नेतृत्व और दिशा दे सकती है।

भारत के लिए क्यों अहम है तारिक की वापसी?

भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पानी, व्यापार, सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों से जुड़े हैं। शेख हसीना सरकार के दौर में दोनों देशों के संबंध मजबूत रहे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इनमें ठंडापन देखा गया है।तारिक रहमान को भारत के प्रति सख्त रुख रखने वाला नेता माना जाता है। उनका नारा रहा है—
“न दिल्ली, न पिंडी — बांग्लादेश पहले।” तीस्ता जल बंटवारे और शेख हसीना को भारत में शरण दिए जाने जैसे मुद्दों पर उन्होंने नाराजगी जताई है। अगर BNP सत्ता में आती है और जमात-ए-इस्लामी जैसे दलों से नजदीकी बढ़ती है, तो सीमा सुरक्षा और उग्रवाद जैसे मसलों पर भारत की चिंताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि हाल के बयानों में तारिक रहमान ने भारत के साथ बेहतर रिश्तों की इच्छा भी जताई है, लेकिन बांग्लादेश के हितों को प्राथमिकता देने की बात दोहराई है।

आगे की तस्वीर

80 वर्षीय खालिदा जिया गंभीर रूप से बीमार हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि BNP की पूरी कमान अब तारिक रहमान के हाथ में आ सकती है। पार्टी इसे लोकतंत्र की मजबूती बता रही है, जबकि आलोचक इसे पुराने सत्ता संघर्ष की वापसी के रूप में देख रहे हैं।तारिक रहमान की वापसी से बांग्लादेश की राजनीति में नया अध्याय शुरू होना तय है, लेकिन यह अध्याय स्थिरता लाएगा या पुराने टकरावों को फिर से तेज करेगा—इसका जवाब आने वाले चुनाव और उनकी राजनीतिक दिशा तय करेगी।

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