बिहार विधानसभा चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर JMM-RJD में खींचतान

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर JMM-RJD में खींचतान

Bihar Desk: जैसे-जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे INDIA गठबंधन के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। ताजा मामला झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बीच सीट बंटवारे को लेकर टकराव का है। झारखंड के मुख्यमंत्री और JMM प्रमुख हेमंत सोरेन ने दो टूक कह दिया है कि वे बिहार चुनाव में ‘सम्मानजनक हिस्सेदारी’ चाहते हैं, और अगर उन्हें दरकिनार किया गया, तो पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने को तैयार है।

क्या JMM का बिहार में है जनाधार?

यह सवाल अब हर राजनीतिक विश्लेषक के जेहन में है।
2020 के विधानसभा चुनाव में JMM ने 5 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और उसे 23,000 से अधिक वोट मिले थे। खास बात यह रही कि उसी चुनाव में INDIA (महागठबंधन) और NDA के बीच सिर्फ 11,000 वोटों का अंतर था।
इससे संकेत मिला कि JMM भले सीमित सीटों पर लड़ी, लेकिन उसकी मौजूदगी ने कुछ सीटों पर निर्णायक असर डाला।

JMM का वोट बेस मुख्य रूप से झारखंड से सटे सीमावर्ती जिलों में है, जैसे – जमुई, बांका, भागलपुर, कटिहार और नवादा। इन इलाकों में झारखंड की राजनीतिक संस्कृति और आदिवासी नेतृत्व का असर देखा गया है।

हेमंत सोरेन क्यों नाराज़ हैं?

INDIA गठबंधन की अब तक चार बड़ी बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन JMM को एक में भी नहीं बुलाया गया।

सोरेन ने स्पष्ट रूप से कहा — “हम मेहमान नहीं हैं, हम भी इस गठबंधन के भागीदार हैं। अगर हमें सम्मान नहीं मिला तो हमारे पास संगठन भी है और जनसमर्थन भी।”

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में JMM ने INDIA गठबंधन का खुले तौर पर समर्थन किया था। अब वह उम्मीद कर रहे हैं कि RJD वैसा ही गठबंधन धर्म निभाए।

सीट बंटवारे की गणित: सबसे जटिल चुनौती

सूत्रों की मानें तो इस बार सीटों के संभावित बंटवारे का प्रारूप कुछ इस तरह बन रहा है:

RJD: 138 सीटें

कांग्रेस: 54 सीटें

वामदल (CPIML आदि): 30 सीटें

VIP पार्टी: 18 सीटें

इस बंटवारे में JMM के लिए कोई स्पष्ट जगह अभी तक नहीं बनी है।
वहीं, CPIML (माले) ने 40 सीटों की मांग कर दी है, जिससे तेजस्वी यादव के लिए सीट बंटवारे का गणित और भी जटिल हो गया है।

‘गठबंधन धर्म’ या ‘राजनीतिक गणित’?

JMM का तर्क साफ है —
जब 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव हुआ था, तब RJD ने वहां सीटों की मांग की थी और JMM ने उन्हें सम्मानजनक हिस्सेदारी दी थी। अब बारी RJD की है कि वह वही भावना दिखाए।

लेकिन बिहार में RJD की राजनीति पूरी तरह बिहार केंद्रित और वर्चस्व आधारित रही है। तेजस्वी यादव पहले से ही गठबंधन की बड़ी पार्टी हैं और वे सीटों पर समझौता करने के मूड में नहीं लगते।

JMM की सख्त चेतावनी

JMM ने सार्वजनिक रूप से कहा है:

“अगर हमें सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं दी गई, तो हम अकेले भी चुनाव लड़ सकते हैं। हमारे पास संगठन भी है, कार्यकर्ता भी और जनता का भरोसा भी।”

इस बयान ने RJD के खेमें में चिंता बढ़ा दी है, खासकर तब जब गठबंधन पहले से ही सीटों की खींचतान से जूझ रहा है।

क्या 2025 का चुनाव JMM के लिए टर्निंग पॉइंट होगा?

अगर JMM अकेले चुनाव लड़ती है, तो उसके वोट RJD या INDIA गठबंधन से कट सकते हैं, जिससे NDA को अप्रत्याशित लाभ हो सकता है।
झारखंड के पड़ोसी जिलों में JMM का असर दिख सकता है, जिससे टक्कर वाली सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं।

बिहार चुनाव 2025 नज़दीक है और INDIA गठबंधन के भीतर समानता और सम्मान का संकट गहराता जा रहा है।
JMM की दावेदारी को नजरअंदाज करना RJD के लिए भारी पड़ सकता है।
अब देखना है कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव हेमंत सोरेन की बात मानते हैं या राजनीतिक वर्चस्व को प्राथमिकता देते हैं।

 

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