बस्ती, उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की गरिमा को तार-तार कर दिया। एक बेटे ने सिर्फ इस वजह से अपने पिता की हत्या करवा दी क्योंकि उसे “बेटे का अधिकार” नहीं मिल रहा था। खर्चे के लिए तंग किया गया तो उसने खौफनाक रास्ता चुनते हुए अपने ही दोस्तों को सुपारी देकर पिता की जान ले ली।
यह वारदात हरैया थाना क्षेत्र के परसौड़ा गांव की है, जहां 45 वर्षीय रामसूरत चौधरी की उनके ही बेटे अमर ने बेरहमी से हत्या करवा दी। पुलिस के अनुसार, रामसूरत की दो शादियां हुई थीं। पहली पत्नी सरिता से उनके तीन बेटे थे, लेकिन लंबे समय से वह मायके में रह रही थी। वहीं दूसरी पत्नी मिथिलावती के कोई संतान नहीं थी। संपत्ति और भरण-पोषण को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि बेटे अमर ने पिता को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।
रामसूरत चौधरी की हत्या 2 अप्रैल को की गई थी। घटना उस वक्त हुई जब वे मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। तभी हाईवे पर पीछे से एक बिना नंबर की पिकअप गाड़ी आई और उन्हें कुचल डाला। पहले तो मामला दुर्घटना का लग रहा था, लेकिन जब जांच गहराई से की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि अमर पिछले एक महीने से अपने पिता की रेकी कर रहा था। उसने अपने खास दोस्तों जयप्रकाश और अनिल को इस साजिश में शामिल किया और पिकअप से कुचल कर हत्या करने की योजना बनाई। यह हत्या महज सड़क हादसे की तरह दिखाने की कोशिश थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने पूरे मामले की परतें खोल दीं।
मृतक की बहन चंद्रकला देवी ने छह लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश का मुकदमा कप्तानगंज थाने में दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच में पाया कि हत्या की मुख्य वजह पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण का मामला था। पहली पत्नी द्वारा कोर्ट में खर्चे के लिए केस दायर किया गया था, जिससे अमर और उसकी मां बेहद नाराज थे।
डीएसपी ने बताया कि आरोपी अमर और उसके साथी जयप्रकाश व अनिल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। जबकि अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है।
यह मामला सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि उस मानसिकता को भी दर्शाता है जिसमें पैसों और संपत्ति के लिए इंसान रिश्तों की कीमत तक भूल जाता है। पुलिस अब गहन जांच के जरिए बाकी आरोपियों को भी जल्द पकड़ने का दावा कर रही है। यह हत्याकांड न सिर्फ समाज को झकझोरता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि जब बेटा ही पिता का हत्यारा बन जाए, तो भरोसे की डोर आखिर किस पर बंधे?




