पश्चिम बंगाल में रामनवमी के मद्देनज़र सियासी और सामाजिक माहौल गर्म होता जा रहा है। राज्य में तनावपूर्ण हालात के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने हावड़ा जिले में रामनवमी की शोभायात्रा निकालने की सशर्त अनुमति दे दी है। अदालत ने यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया, जिसमें अंजनी पुत्र सेना नामक संगठन ने पारंपरिक शोभायात्रा पर लगे प्रतिबंध को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जुलूस में हथियार ले जाने, डीजे बजाने और बाइक रैली निकालने की सख्त मनाही रहेगी। इसके अलावा, कोर्ट ने रैली में अधिकतम 500 लोगों के ही शामिल होने की अनुमति दी है। सभी शोभायात्राएं केवल जीटी रोड के निर्धारित मार्ग से ही गुजरेंगी। कोर्ट ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया है कि वह हालात पर सतर्क निगरानी रखे और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी सतर्कता बरते।
रामनवमी इस वर्ष 6 अप्रैल को मनाई जाएगी और यह त्योहार राज्य में लंबे समय से विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है। हालांकि, पिछले वर्षों में हावड़ा समेत कई इलाकों में इस अवसर पर हिंसा की घटनाएं भी देखी गई थीं, जिसे ध्यान में रखते हुए पुलिस ने इस बार पारंपरिक मार्ग से शोभायात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई थी।
इस बीच राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह रामनवमी का पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्द्रपूर्ण ढंग से संपन्न कराए। उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती और सभी आवश्यक एहतियाती उपाय करने का आदेश दिया है। राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राज्यपाल किसी भी अप्रिय घटना की सूचना तत्काल राजभवन को देने की बात कही है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्यवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी ने कहा, “हम विवेकानंद और रामकृष्ण की शिक्षाओं पर चलते हैं, जुमला पार्टी की नहीं।”
वहीं, बीजेपी ने राज्यभर के हिंदुओं से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में रामनवमी की शोभायात्राओं में हिस्सा लें। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि करीब डेढ़ करोड़ हिंदू इस पर्व पर रैलियों में भाग लेंगे और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाएंगे। उन्होंने कहा, “यह हमारी ताकत दिखाने का समय है। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना धार्मिक पर्व मनाएंगे।”
रामनवमी को लेकर जहां एक ओर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है, वहीं प्रशासन की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि यह धार्मिक आयोजन शांति और व्यवस्था के साथ संपन्न हो।




