पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। ईद के अवसर पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधान पार्षद (MLC) गुलाम गौस राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के आवास पर पहुंचे और उन्हें बधाई दी। इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं, क्योंकि यह ऐसे समय हुई है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले से ही वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर मुस्लिम संगठनों के निशाने पर हैं।
सियासी समीकरणों के नए संकेत?
इस मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। गुलाम गौस ने इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि उनके लालू यादव से अच्छे संबंध रहे हैं, इसलिए ईद की बधाई देने गए थे। हालांकि, इसे महज एक औपचारिक मुलाकात मानना मुश्किल है, क्योंकि इससे पहले भी जेडीयू के कई मुस्लिम नेताओं ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।
वक्फ संशोधन विधेयक पर विवाद जारी
वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ मुस्लिम संगठन और नेता लगातार विरोध कर रहे हैं। लालू यादव पहले ही इस विधेयक के खिलाफ धरने पर बैठ चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर ने भी उम्मीद जताई है कि नीतीश कुमार संसद में इस विवादास्पद विधेयक के खिलाफ रुख अपनाएंगे।
नीतीश की परंपरा और मदनी का बहिष्कार
ईद के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में ईद की बधाई दी, लेकिन मुस्लिम नेता अरशद मदनी ने जेडीयू की ओर से आयोजित इफ्तार का बहिष्कार करने की घोषणा की थी। इस पर तारिक अनवर ने कहा कि यह अच्छी बात है कि नीतीश कुमार अपनी परंपरा बनाए हुए हैं, लेकिन उन्हें यह भी साबित करना होगा कि यह सिर्फ दिखावा नहीं है।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव संभव?
बिहार की राजनीति में अक्सर नए समीकरण बनते-बिगड़ते रहते हैं। गुलाम गौस की लालू यादव से मुलाकात को महज शिष्टाचार कहना सही नहीं होगा। यह संकेत दे सकता है कि जेडीयू के कुछ नेता पार्टी से नाराज हो सकते हैं। वहीं, आरजेडी भी मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिशों में जुटी हुई है।
बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम एक नए सियासी मोड़ की ओर इशारा कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुलाकात के और भी राजनीतिक मायने निकल सकते हैं।




