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जस्टिस यशवंत वर्मा केस: CJI को रिपोर्ट का इंतजार, FIR की इजाजत संभव- सूत्र

जस्टिस यशवंत वर्मा केस: CJI को रिपोर्ट का इंतजार, FIR की इजाजत संभव- सूत्र

नई दिल्ली, दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में जांच जारी है। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने इस घटना के बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट करने की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। विधि एवं न्याय मंत्रालय ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यभार संभालने का निर्देश दिया है।

CJI इन-हाउस जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे

सूत्रों के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना इस मामले की जांच कर रही तीन जजों की कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद CJI दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की इजाजत दे सकते हैं. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए CJI से अनुमति मांगी थी। माना जा रहा है कि अप्रैल के पहले सप्ताह के अंत तक जांच समिति अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। इसके बाद CJI इस मामले में आगे की कार्रवाई का निर्णय लेंगे।

क्या जस्टिस वर्मा को बदनाम करने की साजिश?

दिल्ली पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह नकदी जस्टिस यशवंत वर्मा की थी या उन्हें बदनाम करने के लिए रखी गई थी। CJI खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए जांच पैनल गठित किया था, जो इस मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।

तीन जजों की कमेटी कर रही मामले की जांच

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी एस सिधरावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज अनु शिवरामन शामिल हैं।

अगले दो हफ्तों में आ सकती है रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार, यह जांच समिति अप्रैल के पहले सप्ताह के अंत तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। इसके बाद CJI इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति देने पर फैसला करेंगे।

न्यायपालिका की साख दांव पर

यह मामला भारतीय न्यायपालिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। यदि जस्टिस वर्मा के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो यह उच्च न्यायपालिका की छवि को गहरा आघात पहुंचा सकता है। वहीं, अगर यह साजिश साबित होती है, तो यह भी एक गंभीर मामला होगा। अब सबकी नजरें जांच समिति की रिपोर्ट और CJI के फैसले पर टिकी हैं।

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