कश्मीर में अलगाववाद इतिहास बना: अमित शाह, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े दो संगठन

कश्मीर में अलगाववाद इतिहास बना: अमित शाह, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े दो संगठन

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद अब इतिहास बनकर रह गया है। उन्होंने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े दो संगठनों— जेके पीपुल्स मूवमेंट और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट— द्वारा अलगाववाद से अपने सभी संबंध तोड़ने की घोषणा का स्वागत किया। शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एकीकरण नीति की सफलता बताया और कहा कि यह कश्मीर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अलगाववाद से तौबा करने वाले संगठन
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस वर्षों से कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। लेकिन हाल ही में इसके दो प्रमुख घटकों— जेके पीपुल्स मूवमेंट और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट— ने घोषणा की कि वे अब अलगाववाद का समर्थन नहीं करेंगे। इस फैसले के बाद घाटी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, और इसे मोदी सरकार की रणनीति की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“मोदी सरकार की एकीकरण नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को खत्म कर दिया है। हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में इस कदम का स्वागत करता हूं और सभी संगठनों से अपील करता हूं कि वे आगे आएं और अलगाववाद को हमेशा के लिए समाप्त करें।”

370 हटने के बाद बदले हालात
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पहले जहां अलगाववादी संगठनों का प्रभाव था, वहीं अब मुख्यधारा की राजनीति और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि आतंकवाद और अलगाववाद पर लगातार कड़ी कार्रवाई से कश्मीर में स्थिरता और शांति लौटी है।

केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदम:

हुर्रियत के नेताओं पर सख्ती और उनके वित्तीय स्रोतों की जांच

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद विकास परियोजनाओं में तेजी

युवाओं के लिए नए रोजगार और शिक्षा के अवसर

बदलते कश्मीर की तस्वीर
2019 के बाद से सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिससे कश्मीर में बदलाव स्पष्ट दिख रहा है। पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि, बड़े निवेश और स्थिर कानून-व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि कश्मीर अब एक नए युग की ओर बढ़ रहा है।

शाह के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। सरकार जहां इसे अपनी जीत बता रही है, वहीं कुछ विपक्षी दल और स्थानीय नेता इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अलगाववाद के खात्मे से कश्मीर में स्थायी शांति की उम्मीद और मजबूत हो गई है।

अमित शाह का बयान कश्मीर की बदलती हकीकत को दर्शाता है। मोदी सरकार की नीति का असर यह है कि जहां कभी अलगाववाद हावी था, वहां अब मुख्यधारा की राजनीति और विकास की बातें हो रही हैं। हुर्रियत के घटकों द्वारा अलगाववाद छोड़ने की घोषणा इस बदलाव की बड़ी मिसाल है। अब सरकार का अगला लक्ष्य स्थायी शांति, निवेश और कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों के बराबर लाना है।

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