नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में सोमवार रात औरंगजेब को लेकर उपजे विवाद के बाद हिंसा भड़क गई। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक अफवाह ने आग में घी डालने का काम किया, जिससे पूरे सेंट्रल नागपुर में तनाव फैल गया। हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर पथराव किया, गाड़ियों में आग लगा दी और घरों में घुसकर तोड़फोड़ मचाई।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को पूर्व नियोजित साजिश करार दिया है। नागपुर में इस हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या यह सुनियोजित था? पुलिस और प्रशासन किन एंगल से जांच कर रहा है? आइए जानते हैं साजिश के पांच बड़े पहलू।
1. कहां से आए इतने पत्थर?
नागपुर हिंसा के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि उपद्रवियों के पास इतनी बड़ी संख्या में पत्थर कहां से आए? पुलिस को हिंसा वाली जगह पर एक ट्रॉली भरकर पत्थर मिले। इससे शक गहराता है कि दंगे की योजना पहले से बनाई गई थी और हिंसा के लिए पहले से तैयारी की गई थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि हिंसा के पीछे एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।
2. किसने रची नागपुर हिंसा की साजिश?
नागपुर हिंसा की जांच कर रही पुलिस कई एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है। पुलिस के मुताबिक, हिंसा स्थल पर करीब 300-400 लोग मौजूद थे, जिनमें से कई ने पुलिस पर भी हमला किया। प्रशासन ने इलाके के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगालने के आदेश दिए हैं।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आरोप लगाया कि इस विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी के बयान से हुई थी, जिसमें उन्होंने औरंगजेब को “नेकदिल बादशाह” बताया था। क्या नागपुर की हिंसा सिर्फ इसी बयान की वजह से भड़की, या फिर इसके पीछे कोई और गहरी साजिश थी?
3. क्या ‘छावा’ फिल्म ने भड़काया गुस्सा?
नागपुर हिंसा को लेकर यह भी चर्चा है कि यह गुस्सा फिल्म ‘छावा’ देखने के बाद बढ़ा। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे औरंगजेब ने छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज को कैद कर यातनाएं दी थीं।
हालांकि, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वह ‘छावा’ फिल्म को दोष नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में संभाजी महाराज का शौर्य दिखाया गया है, और इसे देखकर लोगों में मुगल शासन के खिलाफ गुस्सा स्वाभाविक रूप से बढ़ा होगा।
4. क्या VHP और बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन बना वजह?
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे 17 मार्च को पूरे महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान नागपुर में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया गया।
बजरंग दल और वीएचपी का दावा है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन एक अफवाह के कारण हिंसा भड़क गई। इस बीच, सीएम फडणवीस ने भी हिंसा को पूर्व नियोजित करार देते हुए कहा कि मौके पर बड़ी संख्या में पत्थर पाए गए, जिससे यह शक होता है कि हिंसा की तैयारी पहले से कर ली गई थी।
5. क्या अफवाहों की वजह से भड़की हिंसा?
नागपुर में हिंसा फैलाने में अफवाहों ने भी बड़ी भूमिका निभाई। पुलिस के मुताबिक, दो अफवाहें फैलाई गईं—
एक धार्मिक ग्रंथ को नुकसान पहुंचाया गया।
एक पवित्र चादर को जला दिया गया।
इन अफवाहों के बाद एक विशेष समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए और सड़कों पर उतर आए। हालांकि, पुलिस ने साफ किया है कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी।
45 गिरफ्तार, 34 पुलिसकर्मी घायल
नागपुर हिंसा में अब तक 45 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस घटना में 34 पुलिसकर्मी और 5 अन्य लोग घायल हुए हैं। हिंसा के दौरान 45 वाहनों में तोड़फोड़ की गई।
राज्य सरकार ने कहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नागपुर के संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
नागपुर हिंसा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं—क्या यह पहले से साजिश थी? कहां से आए पत्थर? क्या VHP और बजरंग दल का प्रदर्शन वजह बनी? या फिर अफवाहों के कारण स्थिति बिगड़ी? पुलिस इन सभी एंगल से जांच कर रही है। फिलहाल, नागपुर में शांति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है।



